मै ख़ुशियाँ ढूँढ़ता हूँ हर ओर,
मगर दुःख हमे ढूँढ़ते हैं।
मै भलाई करता हूँ राघव,
लोग कमियाँ ढूँढ़ते हैं।
हमे नारियल समझकर लोग,
तोड़ते और फोड़ते हैं।
बड़ी उलझन मे हूँ आजकल,
रिश्ते बनने से पहले टूटते हैं।
— डॉक्टर राघवेन्द्र कुमार राघव, बालामऊ, हरदोई
मै ख़ुशियाँ ढूँढ़ता हूँ हर ओर,
मगर दुःख हमे ढूँढ़ते हैं।
मै भलाई करता हूँ राघव,
लोग कमियाँ ढूँढ़ते हैं।
हमे नारियल समझकर लोग,
तोड़ते और फोड़ते हैं।
बड़ी उलझन मे हूँ आजकल,
रिश्ते बनने से पहले टूटते हैं।
— डॉक्टर राघवेन्द्र कुमार राघव, बालामऊ, हरदोई