नरेन्द्र मोदी ने सेना का राजनीतीकरण किया, कैसे?

आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

‘मुक्त मीडिया’ का ‘आज’ का सम्पादकीय

— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

देश की राजनीति इतनी गर्हित हो चुकी है कि न्यूइण्डिया की मोदी-सरकार के प्रधानमन्त्री ने भारत की सेना का भी राजनीतीकरण कर दिया है। बिहार में चुनाव होनेवाला है और बिहारियों को २० जून को सम्बोधित करते हुए, मोदी ने यह सार्वजनिक किया था कि लद्दाख में जब देश के २० सैनिक मारे गये थे तब ‘बिहार रेजिमेंट’ के सैनिकों ने पराक्रम दिखाया था।

वर्ष २०१४ से अब तक नरेन्द्र मोदी के सभी चुनावी भाषणों का यदि अध्ययन किया जाये तो ज्ञात होता है कि वे जब भी किसी राज्य की राजधानी अथवा किसी भी स्थान पर चुनावी भाषण करते हैं तब वे अपने पिटारे में से किसी ऐसे ऐतिहासिक तथ्य को खोज निकालते हैं, जिसका उस स्थान के साथ सीधा सम्बन्ध होता है और जिसका न हाथ होता है और न ही पैर। उसके पीछे मोदी का एकमात्र उद्देश्य होता है, वहाँ की जनता का समर्थन पाना।

नरेन्द्र मोदी भूल जाते हैं कि भारत-चीन सीमा पर गोरखा रेजिमेंट, जाट रेजिमेंट आदिक रेजिमेंट के भी सैनिक तैनात हैं। ऐसे में, नरेन्द्र मोदी का किसी देश के प्रधानमन्त्री के रूप में ऐसा वक्तव्य करना हमारे अन्य रेजिमेंटों के सैनिकों का मनोबल प्रभावित करता है। क्या कोरोनाकाल में लाखों की संख्या में येन-केन-प्रकारेण बहुत ही बुरी स्थिति में अपने घर वापस हुए प्रवासी बिहारी कामगारों को मोदी-सरकार की निर्ममता का एहसास नहीं है?

न्यूइण्डिया के मोदी-सरकार लगातार इस प्रश्न का उत्तर देने से कतराती आ रही है– आख़िर गल्वन/गल्वान में भारत के २० सैनिक क्यों मारे गये थे?

(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; २६ जून, २०२० ईसवी)