‘मुक्त मीडिया’ का ‘आज’ का सम्पादकीय
— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय
आज (२० जून) भी पेट्रोल-डीज़ल के मूल्य में बढ़ोतरी की गयी है। इस तरह लगातार १४ दिनों से बढ़ोतरी की जा रही है। वहीं अन्तरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल के मूल्यों में कमी लायी गयी है। ऐसे में, ये बढ़ोतरी समझ से परे है। इससे एक बात पूरी तरह से साफ़ हो चुकी है; और वह यह कि मोदी-सरकार कोरोना-काल की क्रूरता से प्रभावित देश की जनता के प्रति कोई सह और सम अनुभूति नहीं है। पिछले छ: वर्षों से जिस अमानवीयता के साथ न्यूइण्डिया के शासक नरेन्द्र मोदी भारत की जनता की भावना-संवेदना के साथ ‘साँप-सीढ़ी’ का खेल खेल रहे हैं, वह एक दिन उनके और उनके दल के स्वास्थ्य के लिए जह्रीला बननेवाला है।
केन्द्र-सरकार के प्रवक्ता और मीडियावाले ‘गांधी जी के तीन बन्दर बन गये हैं। सत्तापक्ष के प्रवक्ता लक़्वाग्रस्त हो चुके हैं। दूसरी ओर, सरकार कोरोना-काल से उपजी अपनी आर्थिक दुरवस्था को जनसामान्य की आर्थिक दुर्दशा करके सुधारने के लिए कमर कस चुकी है। उसे अपनी निर्लज्जता और क्रूर आचरण का बोध नहीं है।
न्यूइण्डिया की मोदी-सरकार इस बात को अच्छी तरह से समझती है कि देश की औसत जनता के पास पेट्रोल से चलाये जानेवाले दोपहिया वाहन हैं, इसलिए बड़ी संख्या में अपने ख़ज़ाने में धनराशि भरने के लिए इस निर्मम और निरंकुश सरकार ने इस लोकघाती मार्ग का चयन किया है।
डीज़ल से जनवाहक और मालवाहक वाहन चलाये जाते हैं। ऐसे में डीज़ल के मूल्य में बढ़ोतरी से वाहनों के यात्रा-किराये बढ़ चुके हैं। इतना ही नहीं, खाद्यपदार्थ और अन्य उपयोगी वस्तुओं के मूल्यों में भी बढ़ोतरी देखी जा सकती है। इस तरह इस कथित मोदी-सरकार ने जनता को दोहरी मार मारकर ‘अधमरा’ करने के लिए अपनी कमर कस ली है।
(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; २० जून, २०२० ईसवी)