● नहर का तटबंध टूटने से किसानों की खड़ी फसल बर्बाद, गांव में घुसा पानी, रात में स्थिति का जायजा लेने पहुंचे अफसर ।
उत्तर प्रदेश के कौशाम्बी जिले में रामगंगा माइनर का तटबंध कई जगह से टूटने के कारण किसानों की धान की पकी सैकड़ों बीघा फ़सल बर्बाद हो गई है। इतना ही नहीं नहर का पानी गांव तक पहुंच गया। ग्रामीणों के घरों में पानी घुसने से गृहस्थी भी बरबाद हो रही। किसान और ग्रामीण दोनों ही परेशान हो रहे हैं। सयारा रेलवे ओवरब्रिज के पिलर के पास पानी पहुँचने की सूचना मिली तो एसडीएम सिराथू व सेतु निगम के अधिकारी पानी रुकवाने की कोशिश में लग गए है। इतना ही नहीं रात में डीएम, एसपी व एडीएम भी मौके पर पहुंचे। जेसीबी लगाकर तटबंध को दुरुस्त करने की प्रकिया चालू हो गई। लेकिन अभी भी उनकी कोशिश रंग लाती नहीं दिखी। किसानों की माने तो शीघ्र ही समस्या का निस्तारण नहीं हुआ तो आसपास के अन्य किसानों की फसल बर्बाद हो जाएगी। रात में अफसरों के पहुंचने की जानकारी मीडिया को हुई तो वहां पर मीडिया के लोग पहुंचे। लेकिन कोई भी अफसर नहर कटने के बारे में कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हुआ।
पड़ोसी जनपद फतेपुर से निकले रामगंगा माइनर में अचानक रात पानी देख किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें पड़ गयीं। उनकी चिंता यह थी कि नहर का तटबंध बनाये बिना ही पानी छोड़ दिया गया। वो भी जब ज्यादातर फ़सल पककर तैयार हो चुकी हैं। देखते ही देखते पानी नहर के बांध को तोड़कर खेतो में भरने लगा। किसानों ने पानी रोकने का प्रयास किया, लेकिन सफल नही हो सके। पानी भरने से किसानों की सैकड़ो बीघा फसल बर्बाद हो गई। किसान इसकी शिकायत करने जब सिंचाई ऑफिस गए तो उनको फतेपुर जनपद जा कर शिक़ायत करने की बात कही गयी। इसके अलावा किसानों ने जिलाधिकारी से भी मुलाकात कर अपनी फरियाद सुननी चाही। लेकिन जिलाधिकारी अपने ऐसी वाले ऑफिस में बैठकर मीटिंग करते रहे। अधिकारियों के रवैये से मायूस किसान हर पल बढ़ रहे खेतो में पानी से अपनी बर्बादी का मंजर देखने भर को मजबूर हैं और उसकी सुनने वाला कोई नही हैं।
महिला किसान इमामुन निशा के मुताबिक उनकी फसल पक चुके हुई थी वह दो एक दिन में काटने वाली थी लेकिन अचानक नहर के पानी से उनकी फसल डूब कर बर्बाद हो रही है।लेकिन जब सायरा रेलवे वरब्रिज के पिलर के पास पानी पहुचने की सूचना मिली तो एसडीएम सिराथू राजेश श्रीवास्तव व सेतु निगम के अधिकारी मजदूर बुला पानी रुकवाने की कोशिश में लग गए है । रात में तो मुख्यालय से डीएम, एसपी, एडीएम व अन्य अफसर भी पहुंचे।
राम गंगा नहर में सफाई, मरम्मत व अन्य कई सुधार करने के लिए शासन ने 23 करोड़ रुपये भी जारी किया था। अधिकारियों ने थोड़ा बहुत सफाई कार्य करवाने के बाद ही नहर में पानी छोड़ दिया। जिससे नहर जगह-जगह से टूट गई और किसानों की फसल खराब हो रही है । यही कारण है कि मीडिया के सामने इस घोटाले की पोल न खुल जाए अधिकारी कैमरे के सामने आने से कतरा रहे है। अधिकारियों की इस लापरवाही से मोदी सरकार के किसानों की आय दुगनी करने की बात भी बेकार सी लगती है।