‘निर्मल मन के मोती’ वाकई निर्मल है  

‘निर्मल मन के मोती’ कविता संग्रह कवि गौरी शंकर उपाध्याय ‘उदय ’95 कविताओं का गुलदस्ता है | जिसमे कविता मिश्रित गीत एक अदभुत तालमेल का संयोजन है जो मन को छू जाता है | वंदना के स्वर मुखरित हो उठते है – ‘चरणों में तेरे शीश नमाऊं /ज्ञान सागर में डुबकी लगाऊँ /मन मंदिर में कर दो उजियारा /हमने थामा है दामन तुम्हारा ‘ रक्षा बंधन – ‘रक्षा बंधन मंगल मय बहिना घर जाती है/ माता -पिता की दुआ से जीवन का सुख पाती है /बाबुल के घर से खुशियां खूब लाई है /देखो बहना आई है जी देखो बहना आई है ‘वंदना ,पर्यावरण, देश भक्ति ,उज्जयिनी के वृतांत की कविता ,बेटी की कविता,मौसम ,श्रंगार रस से ओतप्रोत ‘कई कविताएं के भाव सुन्दर बन पड़े है |’हवा चली मदमस्त सुहानी ,चुनरी उडी जाय रे /पिया से आँखे चार हो गई ,गौरी क्यों सरमाय रे ‘| कवी ने समर्पण स्व श्रीमती निर्मलादेवी उपाध्याय को समर्पित की पंक्तियाँ काव्य संग्रह में पढ़कर आँखों में आसूँ भर जाती है – ‘निर्मल यादों की खुशबु ,महकी -महकी फुलवारी /करके रौनक घर आँगन ,दे बच्चों की किलकारी /चली गयी तुम जब से ,लगता सब कुछ सुना -सुना / रातें लगे चौगुनी तुम बिन ,दिन लगता है दूना ‘ कवि के मनोभाव पठनीय है |धर्म के प्रति कवि की गहरी आस्था से काव्य रचना में ईश्वरीय आराधना पुनीत शब्दों से अमृत रसपान करवाती है | निर्मल मन के मोती की काव्य माला काव्य उपासकों के ह्रद्य में काव्य संग्रह १००% दिलों में जगह बनाएगा| इसमें कोई शक नहीं है। हमारी यही शुभकामनाएँ  है ।


 काव्य संग्रह -निर्मल मन के मोती

लेखक -कवि गौरी शंकर उपाध्याय ‘उदय ‘

          बी -46 सार्थक नगर ,उज्जैन 

मूल्य -201 /-

मुद्रक बादशाह प्रिंटर्स 

समीक्षक -संजय वर्मा ‘दॄष्टि ‘125 ,शहीद भगतसिंग मार्ग ,मनावर (धार )