दुर्गा भाभी का नाम सुनते ही अँगरेज़ काँप उठते थे

प्रयागराज। क्रान्तिकारियोँ की एक भाभी ऐसी थीँ, जिनका नाम सुनते ही अँगरेज़ी प्रशासन का दिमाग़ डावाँडोल हो जाया करता था; क्योँकि अपने स्तर और अपनी नीति के अन्तर्गत वे क्रान्तिकारियोँ का संरक्षण करती थीँ। इलाहाबाद मे पुरुष क्रान्तिकारियोँ के नाम बहुत सुने गये हैँ, जबकि महिला क्रान्तिकारी का नाम बहुत कम। इस दृष्टि से वीरांगना दुर्गा भाभी का स्थान शीर्ष पर रहा है। ७ अक्तूबर को इलाहाबाद ज़िला के शहजादपुर गाँव (जो अब कौशाम्बी ज़िला मे है।) मे जन्म लेकर पलने-बढ़नेवाली दुर्गा भाभी की भारत को आज़ादी दिलाने मे महती भूमिका रही है।

‘सर्जनपीठ’, प्रयागराज की ओर से ‘सारस्वत सदन’, आलोपीबाग़, प्रयागराज से ७ अक्तूबर को आयोजित राष्ट्रीय आन्तर्जालिक बौद्धिक परिसंवाद के अन्तर्गत दुर्गा भाभी की जयन्ती के अवसर पर सर्वप्रथम आयोजक, व्याकरणवेत्ता एवं भाषाविज्ञानी आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ने विषयप्रवर्तन करते हुए बताया– ग्यारह वर्ष की अल्पावस्था मे उनका विवाह लाहौर-निवासी क्रान्तिकारी भगवती चरण बोहरा के साथ हुआ था। भाभी चन्द्रशेखर आज़ाद, भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु, बटुकेश्वर दत्त, सुखदेव इत्यादिक क्रान्तिकारियोँ की सूचना सम्प्रेषित करने के कार्य को बाख़ूबी अंजाम दिया करती थीँ। जब क्रान्तिकारी अपने अभियान पर निकलते थे तब दुर्गा भाभी उनके मस्तक पर मंगल-तिलक लगाकर गर्वपूर्वक विदा करती थीँ। बताया जाता है कि चन्द्रशेखर आज़ाद की जिस पिस्टल देखकर अँगरेज़ भयातुर रहते थे, उसे दुर्गा भाभी ने ही उपलब्ध कराया था। आचार्य ने यह भी बताया कि वर्ष १९१४ मे प्रथम लाहौरषड्यन्त्र-प्रकरण मे अँगरेज़ी प्रशासन ने १८ वर्षीय युवा क्रान्तिकारी सरदार करतार सिंह को शूली पर लटकवाया था, तब क्रान्तिकारियोँ ने सामूहिक रूप से बलिदान-दिवस का आयोजन किया था उस अवसर पर बलिदानी करतार सिंह का एक बड़ा चित्र जिस खद्दर के पर्दे पर लगाया गया था, उसके पास दुर्गा भाभी ने पहुँचकर एक चाक़ू से अपनी अँगुली मे चीरा लगा दिया था, जिससे बहते रक्त से उस खादी के पर्दे को चारोँ ओर से रँग दिया था। आचार्य ने एक अन्य घटना ज़िक्र करते हुए बताया कि वीरांगना दुर्गा भाभी ने भगत सिंह और राजगुरु का जीवन बचाया था। वे दोनो को अँगरेज़ोँ की ख़तरनाक चाल और जाल से बचाने के लिए दोनो को लाहौर ले गयीँ। इसके लिए उन्हेँ भगत सिंह की पत्नी बनने का नाटक करना पड़ा। इसके लिए उन्हेँ अपने तीन वर्षीय शिशु सचिन को भी ख़तरे से दो-चार करना पड़ा था; क्योँकि सचिन उनके साथ ही था।

इस अवसर पर श्रोता के रूप मे अम्बेडकर नगर से डॉ० रोहिताश्व यादव, जगदलपुर से प्रो० जगदम्बिका पटेल, कटनी से शिवकुमार, ठाणे से रजनी पाटिल, सोलन से डॉ० रजनीश उपाध्याय इत्यादिक उपस्थित थे।