‘हिन्दुस्तानी एकेडेमी’, प्रयागराज के अध्यक्ष डॉ० उदय प्रताप सिंह का “ख़ूब लड़ी मर्दानी, वह तो झाँसी वाली रानी थी” की रचनाकार के प्रति अशोभनीय आचरण

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय-

सुभद्रा कुमारी चौहान की जन्मतिथि के अवसर पर ‘हिन्दुस्तानी एकेडेमी’ के अध्यक्ष उदय प्रताप सिंह ने जो विचार व्यक्त किया है, वह अशोभनीय है, फिर उदय प्रताप को नहीं भूलना चाहिए कि वे अध्यापक भी रहे हैं। हिन्दुस्तानी एकेडेमी प्रयागराज में स्थित है और उसे भरपूर शासकीय अनुदान मिल रहा है। ऐसे में, इलाहाबाद में ही पैदा हुईं सुभद्रा कुमारी चौहान-जैसी वीररस की कवयित्री के प्रति उनका उपेक्षापूर्ण यह वक्तव्य, “इतना जन्मदिन हम लोग मनायेंगे तो और काम क्या करेंगे?” विचारणीय बन जाता है। ऐसे में, उदय प्रताप सिंह बताना चाहेंगे– वर्षभर में हिन्दुस्तानी एकेडेमी की ओर से कितने महिला साहित्यकारों का जन्मतिथि और मृत्युतिथि-समारोह का आयोजन किया जाता है? सच तो यह है कि एकेडेमी के अधिकारियों के चयन का आधार एकपक्षीय रहता है।

‘दैनिक जागरण’, प्रयागराज-संस्करण के एक नगर-संवाददाता ने हिन्दुस्तानी एकेडेमी, प्रयागराज के अध्यक्ष डॉ० उदय प्रताप सिंह से १६ अगस्त को वीररस की लब्धप्रतिष्ठ कवयित्री सुभद्रा कुमारी चौहान (जन्मतिथि १६ अगस्त) के जन्मतिथि-समारोह के आयोजन न करने पर प्रश्न किया था तब उनका उत्तर लज्जास्पद रहा। उनका आपत्तिजनक कथन कल (१७ अगस्त) दैनिक जागरण में प्रकाशित किया गया था। उन्होंने अपने कथन से “हम किस-किसका जन्मदिन मनायें। हमारे पास यही एक काम रह गया है क्या?” उदय प्रताप के उस कथन ने साहित्यजगत् को अपमानित किया है। इस पर कल साहित्यकारों का आक्रोश दिखा था, जिसका प्रकाशन आज (१८ अगस्त) दैनिक जागरण ने इस रूप में किया है :–