चीरहरण कर घूमते, बदल-बदलकर वेश!
आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–देश ग़ुलामी जी रहा, हम पर है परहेज़।निजता सबकी है कहाँ, ख़बर सनसनीख़ेज़।।दो–लाखोँ जनता बूड़ती, नहीं किसी को होश।“त्राहिमाम्” हर ओर है, जन-जन मेँ आक्रोश।।तीन–प्रश्न ठिठक कर है खड़ा, उत्तर भी […]