परम्परा और परिवर्तन का संगम
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– गाँव के मध्य स्थित वह विशाल वटवृक्ष अब केवल छाया का स्थान नहीं रहा था; वह सामूहिक चेतना का केन्द्र बन चुका था। उसकी जटाओं की भाँति गाँव के लोगों के […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– गाँव के मध्य स्थित वह विशाल वटवृक्ष अब केवल छाया का स्थान नहीं रहा था; वह सामूहिक चेतना का केन्द्र बन चुका था। उसकी जटाओं की भाँति गाँव के लोगों के […]
नूतन वर्ष का सारस्वत अभिनन्दन करने के उद्देश्य से नगर की प्रतिष्ठित संस्था ‘साहित्यांजलि प्रज्योदि’ की ओर से ‘ग़ज़ल-गीत संगम’ नामक कार्यक्रम का आयोजन ७ जनवरी को मध्याह्न १२ बजे ‘सारस्वत सभागार’, ११३-ए, लूकरगंज, प्रयागराज […]