पुरुष परिधि पर घूम रही नारी बेचारी

March 21, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– शूद्र गँवार ढोल पशु नारीये ताड़न की अधिकारी है।जाति-पाँति से हीन रहीयुग-युग से वह बेचारी है।बुद्धिमान होकर भी नारीजाहिल समझी जाती है।गैरों का पाप लिए सिर परवह दर-दर ठोकर खाती है।जीवन […]

कब तक मरेगी?

May 16, 2022 0

राघवेन्द्र कुमार त्रिपाठी ‘राघव‘ कल भी मरी थी कल भी मरेगी! आख़िर वो कितनी बार जलेगी? पहले तो तन को भेड़िया बन नोच डाला। शरीर से आत्मा तक छेद डाला । लाश बच रही थी […]

पुरुषत्व की मैला

May 2, 2022 0

राघवेन्द्र कुमार त्रिपाठी ‘राघव’– अन्तःविचारों मे उलझा न जाने कब? मै एक अजीब सी बस्ती मे आ गया। बस्ती बड़ी ही ख़ुशनुमा और रंगीन थी। किन्तु वहाँ की हवा मे अनजान सी उदासी थी। ख़ुशबू […]

देह के उतार-चढ़ाव के प्रदर्शन की कोई आवश्यकता नहीं

April 29, 2022 0

राघवेन्द्र कुमार त्रिपाठी ‘राघव’- युगों-युगों से लाज और स्त्री का चोली-दामन सा साथ रहा है, लज्जा तो स्त्री का आभूषण है । भारतीय स्त्री का प्रतिबिम्ब एक स्वर्ण शरीर की मलिका, चंचल, मृगनयनी के समान […]

अभी रुको

April 16, 2022 0

आकांक्षा मिश्रा (अध्येता/लेखिका)- उसने कहा बार -बार मृत्यु नहीं होगी जीवन को जोड़ने के लिए पीड़ा देती है मैं चाहता हूँ हर वक्त साथ रहूँ प्रकृति रहने नही देती रूपक में अभी रुको तुम्हे निकट […]

बेटी को मत समझो भार

February 13, 2022 0

बेटी को मत समझो भार,बेटियां हैं जिंदगी का आधार।बेटियां हैं हर घर की शान,दिल से करो उनका सम्मान।भ्रूण हत्या को मिटाना है,बेटियों को जीने का हक दिलाना है।बेटा होना किसी का भाग्य है ,बेटी होना […]

सगर्व-सहर्ष घोषणा–

July 30, 2021 0

मेरी बहुप्रतीक्षित पाण्डुलिपि ‘नारीचरितमानस’ (समग्र नारी-दर्शन) अब अन्तिम रूप ग्रहण कर चुकी है। एक बार दृष्टि-अनुलेपन करूँगा, तदनन्तर उसे प्रकाशन-प्रक्रियाओं के साथ सम्बद्ध करने पर विचार करूँगा। इसमें भावपक्ष, हृदयपक्ष, विचारपक्ष :– आदर्श और यथार्थ […]