“सुरमई अँखियों में इक नन्हा-मुन्ना सपना दे जा रे!”
डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय अभिनय में वह शक्ति है, जो पाषाण को भी द्रवीभूत कर दे। ‘सदमा’ अर्थात् आघात मनुष्य को एक ऐसी मानसिक अवस्था में प्रवेश कराता है, जहाँ उसका जीवन किसी अभिनय से अल्पतर […]
डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय अभिनय में वह शक्ति है, जो पाषाण को भी द्रवीभूत कर दे। ‘सदमा’ अर्थात् आघात मनुष्य को एक ऐसी मानसिक अवस्था में प्रवेश कराता है, जहाँ उसका जीवन किसी अभिनय से अल्पतर […]
खेतों की ओर शौच क्रिया करने के लिए गई किशोरी से गांव के ही एक युवक ने छेड़छाड़ की किशोरी ने घर आकर आपबीती बताई और जहरीला पदार्थ खा […]
डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, (भाषाविद्-समीक्षक), इलाहाबाद- शिक्षाविद्-समीक्षक डॉ० अरविन्द उपाध्याय की शीघ्र प्रकाश्य शोधात्मक कृति ‘ से० रा० यात्री की कहानियों का मध्यवर्गीय स्वरूप’ की ‘फ़्लैप’ सामग्री पर एक दृष्टि :- से० रा० यात्री (सेवाराम यात्री) […]