जब मन न माने……
महेेन्द्र महर्षि (सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारी, दूरदर्शन) जब फूलों की बहार आने लगी तो एक सुबह अपने ब्लाक के ऊपरी छज्जे पर मधुमक्खी का छत्ता नज़र आया। फिर तो रोज़ ही उसे देखना रूटीन बन गया। […]
महेेन्द्र महर्षि (सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारी, दूरदर्शन) जब फूलों की बहार आने लगी तो एक सुबह अपने ब्लाक के ऊपरी छज्जे पर मधुमक्खी का छत्ता नज़र आया। फिर तो रोज़ ही उसे देखना रूटीन बन गया। […]
महेन्द्र महर्षि- किसी ने बर्फ़ से पूछा, “तुम इतनी ठण्डी क्यों हो” ? बर्फ़ का जबाब था , मेरा भूत भी पानी, वर्तमान -पिघलता पानी और भविष्य का कल भी पानी, तो गरम होकर क्या […]