संकुचित दृष्टि का विस्तार आवश्यक है

May 17, 2018 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय वाह री, बुद्धिमान् और बुद्धिमती जीव! कोई मुझे ‘काँग्रेसी’ समझता है; कोई ‘साम्यवादी’ तो कोई ‘बी०जे०पी०-विरोधी’। ऐसे अतिरिक्त बुद्धिवादी कूपमण्डूक हैं; क्योंकि अपनी बुद्धि का विस्तार नहीं करना चाहते। यही कारण है […]