“सुरमई अँखियों में इक नन्हा-मुन्ना सपना दे जा रे!”

August 6, 2018 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय  अभिनय में वह शक्ति है, जो पाषाण को भी द्रवीभूत कर दे। ‘सदमा’ अर्थात् आघात मनुष्य को एक ऐसी मानसिक अवस्था में प्रवेश कराता है, जहाँ उसका जीवन किसी अभिनय से अल्पतर […]