ज्ञान और संस्कार से होता है “मर्यादित आचरण”
ज्ञान का अर्थ है सत्य की अनुभूति करना। ज्ञान प्राप्त होने पर व्यक्ति निर्भय हो जाता है। ज्ञान है तो डर कैसा? ज्ञानी व्यक्ति तो प्रिय अप्रिय सुख दुख इत्यादि भावों से निरपेक्ष होता है। […]
ज्ञान का अर्थ है सत्य की अनुभूति करना। ज्ञान प्राप्त होने पर व्यक्ति निर्भय हो जाता है। ज्ञान है तो डर कैसा? ज्ञानी व्यक्ति तो प्रिय अप्रिय सुख दुख इत्यादि भावों से निरपेक्ष होता है। […]