चिन्तन की एक कड़ी : मनसा-वाचा-कर्मणा परिशुद्ध मनुष्य को कोई पसन्द नहीं करता
डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय- मनसा-वाचा-कर्मणा परिशुद्ध मनुष्य को कोई पसन्द नहीं करता, क्योंकि वह प्रत्येक सत्य को ‘सत्य’ के साथ विकाररहित होकर कहता है; उसके कथन और कर्म में कोई भेद नहीं रह जाता। लक्ष्य-संधान करते […]