चिन्तन की एक कड़ी
डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय वाह रे मनुष्य ! ‘मोदी-मोदी’ अथवा ‘योगी-योगी’ अथवा इस तरह की कोई भी गतिविधि मात्र पानी का एक बुलबुला है। जल की सतह पर कुछ ही पल के लिए ‘बुलबुला’ दिखता है […]
डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय वाह रे मनुष्य ! ‘मोदी-मोदी’ अथवा ‘योगी-योगी’ अथवा इस तरह की कोई भी गतिविधि मात्र पानी का एक बुलबुला है। जल की सतह पर कुछ ही पल के लिए ‘बुलबुला’ दिखता है […]