तत्सम, तद्भव, देशज तथा विदेशज शब्दावली का मनोहारी दर्शन तुम कौन हो?

July 10, 2018 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय मैं अपलक उसे निहार रहा था। राजहंस-सा गौर वर्ण, द्रुत विलम्बित-सी गति, अभिधावाणी, उपनागरिका वृत्ति-सी प्रकृति, प्रसाद गुण-सा शील, मासूम चेहरे पर खिलता श्रृंगार-रस, अंग-अंग से फूटता हुआ शब्दालंकार। उसने कुछ कहा […]