जो आचरण में हो, ‘उसे ही’ कहना सीखें

August 21, 2021 0

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय कर्म के दो रूप हैं :– प्रथम, नकारात्मक और द्वितीय, सकारात्मक। कर्म के तीन पक्ष हैं :– प्रथम, सैद्धान्तिक; द्वितीय व्यावहारिक तथा तृतीय, सैद्धान्तिक-व्यावहारिक। ये अनुभवजन्य मेरी मान्यताएँ हैं; इन्हें […]

डॉ. निशंक की महनीय शब्द-सत्ता – आचार्य पं. पृथ्वीनाथ

December 22, 2020 0

‘सिदो कान्हु मुर्मु विश्वविद्यालय’, दुमका (झारखंड) की ओर से ‘वातायन’ अंतरराष्ट्रीय शिखर सम्मान 2020 के संदर्भ में डॉ. निशंक का रचना-संसार’ विषय पर द्विदिवसीय ऑन-लाइन अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी 23-24 दिसम्बर को अपराह्न 4- बजे से आयोजित […]