जो आचरण में हो, ‘उसे ही’ कहना सीखें
★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय कर्म के दो रूप हैं :– प्रथम, नकारात्मक और द्वितीय, सकारात्मक। कर्म के तीन पक्ष हैं :– प्रथम, सैद्धान्तिक; द्वितीय व्यावहारिक तथा तृतीय, सैद्धान्तिक-व्यावहारिक। ये अनुभवजन्य मेरी मान्यताएँ हैं; इन्हें […]