नास्तिक और आस्तिक की अवधारणा
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय सच तो यह है कि इस लोक मे कुछ भी ‘नास्ति’ (न+अस्ति=नास्ति) नहीं है; सब कुछ ‘सास्ति’ (स +अस्ति=सास्ति) है। नास्तिक तो कोई भी नहीं है। सुशिक्षित समाज इन दोनो […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय सच तो यह है कि इस लोक मे कुछ भी ‘नास्ति’ (न+अस्ति=नास्ति) नहीं है; सब कुछ ‘सास्ति’ (स +अस्ति=सास्ति) है। नास्तिक तो कोई भी नहीं है। सुशिक्षित समाज इन दोनो […]