कर्म, पुरुषार्थ और अनुकम्पा
पापा पुरुषार्थ में विश्वास रखते थे और अम्मा अनुकंपा में। पापा का विश्वास था कि मनुष्य अपने श्रम से, पौरुष से अपना अभीष्ट लक्ष्य प्राप्त कर सकता है जबकि अम्मा का दृढ़ मत था कि […]
पापा पुरुषार्थ में विश्वास रखते थे और अम्मा अनुकंपा में। पापा का विश्वास था कि मनुष्य अपने श्रम से, पौरुष से अपना अभीष्ट लक्ष्य प्राप्त कर सकता है जबकि अम्मा का दृढ़ मत था कि […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय हम जब जड़-चेतन/स्थावर-जंगम पर ‘नख-शिख’ (नीचे से ऊपर तक) दृष्टि-निक्षेपण/दृष्टिपात करते हैं तब हमे विकृति (विकार) दिखती है और सुकृति (सुकार) भी। यह द्रष्टा का अधिकारक्षेत्र होता है कि वह […]