सुमन्त्र को हुआ भूमिजा का बोध
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– सुमन्त्र मौन थे। उनके हाथों में रथ की लगाम थी, पर मन की लगाम छूट चुकी थी। उनके सामने बैठी जनकनन्दिनी अब केवल महारानी नहीं रह गई थीं। ऐसा प्रतीत होता […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– सुमन्त्र मौन थे। उनके हाथों में रथ की लगाम थी, पर मन की लगाम छूट चुकी थी। उनके सामने बैठी जनकनन्दिनी अब केवल महारानी नहीं रह गई थीं। ऐसा प्रतीत होता […]