यूनाइटेड फोरम ऑफ़ बैंक यूनियंस के बैनर तले कर्मचारियों ने किया विरोध-प्रदर्शन

हरदोई।
बैंकों की प्रमुख समस्या खराब ऋण हैं। बैंकों का विलय इन खराब ऋणों को वसूल करने का कोई समाधान नहीं है। कारपोरेट चूककर्ताओं और दोषियों के विरुद्ध आपराधिक कार्यवाही सहित कठोर उपाय करने की जरूरत है। बैंककर्मी आज अपने देशव्यापी विरोध प्रदर्शन के द्वारा सरकार के बैंकों के विलय के निर्णय को स्पष्ट रूप से अस्वीकृत करते हैं।
यूनाइटेड फोरम ऑफ़ बैंक यूनियंस के बैनर के नीचे विभिन्न बैंकों के कर्मचारी और अधिकारी आज मंगलवार को दोपहर बाद भोजनावकाश में बैंक ऑफ़ बड़ोदा की मुख्य शाखा पर बड़ी संख्या में विरोध प्रदर्शन के लिए इकट्ठे हुए। प्रदर्शनकारी बैंक कर्मियों ने बैंकों के मर्जर को मर्डर बताते हुए सरकार और बैंक मैनेजमेंट के विरोध में जमकर नारेबाजी की।
गौरतलब है कि जिले में बैंक ऑफ बड़ौदा की नौ देना बैंक और विजया बैंक की एक एक शाखा है। यूनाइटेड फोरम ऑफ़ बैंक यूनियंस के स्थानीय संयोजक आर के पाण्डेय ने कहा कि बैंक ऑफ़ बड़ोदा, देना बैंक और विजया बैंक के एकीकरण का प्रस्ताव सरकार का अनुचित निर्णय है। बैंक कर्मचारी इसके विरुद्ध देशव्यापी विरोध प्रदर्शन कर अपना प्ररिरोध व्यक्त कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि पूर्व में स्टेट बैंक में उसके सहयोगी बैंकों के विलय से कोई चमत्कार नहीं हुआ है। इस विलय के नतीजे में बैंक शाखाओं की बंदी, कर्मचारियों की संख्या में कमी, व्यवसाय में कमी और खराब ऋणों में वृद्धि हुयी है। यूनाइटेड फोरम ऑफ़ बैंक यूनियंस के वाइस चेयरमैन क्षितिज पाठक ने कहा कि जो बैंक सदियों से अस्तित्व में हैं और देश की अर्थव्यवस्था में अच्छा योगदान कर रही हैं। उनके नाम से देशवासियों की भावनाए जुडी हुयी है। उनका एकाएक अस्तित्व समाप्त हो जाना देश के लिए किसी सदमे से कम नहीं है।