
(प्रख्यात भाषाविद्-समीक्षक)
डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय
‘हिन्दू-मुसलमान’ की राजनीति करनेवाले देश के युवा बेरोज़गारो!
पहले अपनी सामाजिक स्थिति सुदृढ़ करो। इसके लिए तुम सभी को प्रत्येक स्थिति में स्वावलम्बी बनना होगा। तुम्हें ‘राष्ट्र का कर्णधार’ कहकर तुम्हारे साथ सियासत की दोरंगी चाल चलनेवाले राजनेता तुम्हें तुम्हारा अधिकार नहीं देते। कहने को ‘शिक्षा का अधिकार’ को मूल अधिकार घोषित किया गया है; ‘सबका साथ-सबका विकास’ का खोखला, किन्तु मोहक नारा प्रचारित-प्रसारित हो रहा है परन्तु आज आर्थिक अभावों में जीनेवाले परिवारों की एक बहुत बड़ी संख्या है, जो धन्धेबाज़ी के रूप में सामने आ चुकी ‘शिक्षा-व्यवस्था’ से जुड़ नहीं पा रहे हैं, क्योंकि ‘शिक्षा का अधिकार’ को व्यावहारिक रूप देने के लिए शासन चलानेवालों के पास समय तक नहीं है, जबकि ‘रोडशो’ और तरह-तरह के लोकलुभावन करतब दिखाने के लिए, ‘मन की बात’ सुनाने के लिए समय-ही-समय है; ‘हिन्दुत्व और मुसलमानत्व’ की आड़ में राष्ट्रीयता की पीठ पर चढ़कर सत्ता की राजनीति करने के लिए भरपूर समय है।
तुम सभी के लिए नौकरी और व्यवसाय की जो थोड़ी-बहुत सम्भावनाएँ दिख रही थीं, उन्हें ‘नोटबन्दी’ और ‘जी०एस०टी०’ की राष्ट्रघाती सियासत कर, उन्हें समाप्त करा दिया गया है। देश के लाखों कल-कारख़ाने, उद्योग-धन्धे नरेन्द्र मोदी के ‘वन नेशन-वन टैक्स’ के नाम पर शुरू किये जी०एस०टी० ने लील लिये हैं। तभी तो अपने को प्रधान जनसेवक कहकर क्रूर छल करनेवाले नरेन्द्र मोदी ने देश के बेरोज़गार युवा-वर्ग के स्वप्नों को चूर-चूर कर दिया है। केन्द्रीय सेवाओं में नयी नियुक्तियाँ नहीं की जा रही हैं; जो सेवानिवृत्त होते हैं, उन्हें उनका सेवाविस्तार कर, रख लिया जाता है। इस तरह वे फण्ड, ग्रेच्युटी, पेंशन इत्यादिक पाते हैं और तुम लोग का हक़ भी छीन लेते हैं। इतना ही नहीं, ‘हिन्दुत्व’ की राजनीति करनेवाली भारतीय जनता पार्टी-शासित राज्यों की सरकारों ने प्रतिवर्ष कितने बेरोज़गार हिन्दू युवक-युवतियों को नौकरियाँ दी हैं? २९ जनवरी, २०१८ ई० को मध्यप्रदेश-शासन की चौकीदार और चपरासी की ५७ जगहों के लिए स्नातक-स्नातकोत्तर-उच्च उपाधिधारक बेरोज़गार युवा हिन्दुओं ने परीक्षा दी थी। उत्तरप्रदेश में लाखों की संख्या में शिक्षित बेरोज़गार युवा हिन्दू नौकरी और व्यवसाय पाने के लिए मारे-मारे घूम रहे हैं। जो समय उन्हें अपने भविष्य बनाने का है, उसे छोड़कर न्याय पाने के लिए इस न्यायालय से उस न्यायालय का चक्कर लगा रहे हैं, परन्तु अपना राज्य उत्तरप्रदेश छोड़कर हिमाचलप्रदेश, गुजरात, कर्नाटक, केरल, बंगाल जाकर ‘पोस्टर ब्वॉय’ की भूमिका में मुख्य मन्त्री आदित्यनाथ योगी के पास हिन्दू और हिन्दुत्व की राजनीति करने के लिए अवकाश है किन्तु पाँच हज़ार-छ: हज़ार तक की नौकरी की तलाश में भटक रहे उनके राज्य उत्तरप्रदेश के शिक्षित युवा ़़हिन्दू बेरोज़गारों के प्रति कहीं-कोई सहानुभूति नहीं है। ऐसे में, तुम सभी हिन्दुत्व का चोला उतार फेंको और मात्र एक मनुष्य के रूप में ईमानदारी के साथ अपना जीवन-पथ प्रशस्त करने के प्रति सन्नद्ध बनो। आगामी चुनावों में एकनिष्ठ होकर ‘हिन्दुत्व और मुसलमानत्व’ के नाम पर छल करनेवालों को ऐसी सीख दो कि देश में शिक्षित युवा बेरोज़गार-वर्ग की हैसियत का अन्दाज़ा इन संवेदनहीन राजनेताओं को लग सके।
अब भी तुम सबकी आँखें नहीं खुलती हैं तो इससे अधिक विडम्बना और कुछ नहीं हो सकती। तुम्हारे परिवार के लोग तुम पर बोझ लगने लगेंगे और तुम उनपर अतिरिक्त बोझ के रूप में दिखने लगोगे तब तुम सभी के सामने “जायें तो जायें कहाँ” की स्थिति मुँह बाये खड़ी दिखेगी और तुम ‘किंकर्त्तव्यविमूढ़’ की अवस्था में स्वयं को पाते रहोगे।
ऐसी भयावह दशा में रहना स्वीकार हो तो ‘हिन्दुत्व और मुसलमानत्व’ तुम सभी को बहुत-बहुत मुबारक। अभी तुमने वास्तविक जीवन-संघर्ष का सामना नहीं किया है। माँ-बाप अथवा अभिभावक कितने कष्टसाध्य, श्रमसाध्य कर्म करने के बाद तुम्हारी आजीविका, शिक्षा, सुरक्षा इत्यादिक के लिए सुविधा-साधन जुटाते हैं और तुम लोग उनकी आँखों में धूल झोंकते हुए, ‘हिन्दुत्व और मुसलमानत्व’ का झण्डा लहरा रहे हो। ऐसे में, तुम सभी को यदि दुत्कारा जाये तो कहीं से भी अनुचित नहीं होगा।
यही हिन्दुत्व-मुसलमानत्व तुम्हारी सारी सकारात्मक ऊर्जा को शोषित कर, तुम्हें नकारात्मक बनाते हुए, अपने पीछे-पीछे नचाते रहेंगे और तुम लोग दिशाहीन होकर ‘अपने होने’ के अर्थ को खोते जाओगे। तुम्हारी सन्तानें जब तुमसे अपनी समय-सत्य आवश्यकताओं की माँग करेंगी तब तुम अभावग्रस्त परिस्थिति में दिखोगे। ऐसे में, मोदी और योगी या फिर ओबैसी, जिनका गुणगान करते तुम लोग थकते-नहीं-थकते, तुम्हारी हथेली पर दो हज़ार रुपये का गुलाबी नोट रखेंगे? आज़्माने में बुराई क्या है? पर दोस्त! मत भूलो, उन तक तुम्हारा पहुँचना ही “टेढ़ी खीर” है। अपनी सन्तान को यदि तुम लोग शिक्षित-दीक्षित कर स्वावलम्बी नहीं बनाओगे तो वे तुम्हें कभी क्षमा नहीं करेंगे, क्योंकि जब तुम सभी को एकाग्र रहकर अपने भविष्य-निर्माण करने का स्वर्णिम अवसर मिला था तब तो ‘हिन्दुत्व और मुसलमानत्व’ के ध्वज लेकर, सीना तानकर खुली सड़कों पर समाज में ज़ह्र घोलते रहे। सारे राजनीतिक दलों से दूर रहकर अपने मूल लक्ष्य की ओर बढ़ो, अन्यथा ” न ख़ुदा ही मिला, न विसाले सनम” लोककथन सिद्ध होगा। हो सकता है, वैसी दुर्धर्ष परिस्थिति में तुममें से कई अपराध-जगत् में चले जायें;कुछ आत्महत्या तक कर लें तथा कई चाट-पकौड़े की दूकानें खोल लें। प्रधान मन्त्री नरेन्द्र मोदी को लज्जा आनी चाहिए, जिसने लाचार होकर ‘पकौड़े’ बेचनेवाले को रोज़गार कहा है। उस पकौड़े बेचनेवाले की मोदी ने कोई आर्थिक सहायता की? कई बार, कई तरह के ‘फॉर्म’ भरने और परीक्षाएँ देने के बाद भी आरक्षण और रिश्वतख़ोरी आदिक विसंगतियों के कारण नौकरी नहीं मिलने से, अन्तत:, लाचार होकर उसे पकौड़े बेचने पड़े हैं। इससे सिद्ध होता है कि भारत-सरकार का नेतृत्व करनेवाला व्यक्ति कितना क्षुद्र सोच रखता है। सियासत करनेवाले ऐसे लोग अपने लिए जीते हैं, तुम सबके लिए नहीं। यदि वास्तव में, हिन्दुओं की पार्टी ‘भारतीय जनता पार्टी’ रहती तो देश के प्रत्येक बेरोज़गार हिन्दू को न्यूनतम एक हज़ार रुपये मासिक बेरोज़गार-भत्ता दे सकती थी परन्तु “हाथी के दाँत खाने के और दिखाने के” अलग-अलग दिख रहे हैं। यह इतनी घिनौनी सरकार है कि मुसलमानों के लिए ‘अल्पसंख्यक मन्त्रालय’ का गठन करा रखी है; अल्पसंख्यक आयोग गठित किया जा चुका है। अल्पसंख्यक मन्त्रालय की ओर से मुसलमानों की लड़कियों को मुफ़्त प्राविधिक शिक्षा, छात्रवृत्ति आदिक देने की सुविधा है और हिन्दुओं की लड़कियों के लिए कोई सुविधा नहीं।
‘मोदी-मोदी’, ‘योगी-योगी’ जपनेवाले युवा बेरोज़गारो! बताओ, भारतीय जनता पार्टी हिन्दुओं की पार्टी कैसे हुई? ‘हिन्दू’ के नाम पर ‘वोट’ माँगनेवाली भारतीय जनता पार्टी-शासित केन्द्र की सरकार ‘बहुसंख्यकों’ के मन्त्रालय का गठन क्यों नहीं करायी थी? इससे ज़ाहिर होता है कि सत्ता पाने के लिए यह ‘हिन्दू कार्ड’ चलती है और सत्ता में आ जाने के बाद हिन्दुओं को लात मार देती है फिर भी हमारे हिन्दू ‘मोदी-मोदी’, ‘योगी-योगी’ और ‘नमो-नमो’ करते नहीं अघाते।
ऐसे में, तुम लोग अपनी शक्ति और सामर्थ्य को पहचानो। समय को ‘हिन्दू और हिन्दुत्व’, मुसलमान और मुसलमानत्व’ के चक्कर में व्यर्थ मत करो, अन्यथा समय तुम्हें कभी क्षमा नहीं करेगा। तुम ‘नख-शिख’ बेरोज़गारी के दंश से इतने विषाक्त दिखोगे कि सोचने-समझने की सारी सामर्थ्य खो देगे; कुण्ठित-लुण्ठित होकर अवसाद की स्थिति में आ जाओगे। जब तुम्हारी मूल शक्ति क्षीण हो जायेगी तब यही सियासत एक कोने में ‘निष्क्रिय’ बनाकर तुम्हें धकेल देगी तब तुम सभी अपनी-अपनी हथेलियों की लकीरों को बाँचने का असफल प्रयास करते हुए, पश्चात्ताप की आग में धधकते हुए दिखोगे। फिर यह लोकोक्ति सार्थक होती बार-बार दिखेगी : अब पछताये होत का जब चिड़िया चुग ग्यो खेत।
(सर्वाधिकार सुरक्षित : डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, इलाहाबाद; ३० जनवरी, २०१८ ई०)