देहदानी शिक्षाविद् और लेखक प्रेमशंकर खरे का देहावसान!

नगर के प्रतिष्ठित शिक्षाविद् और साहित्यकार प्रेमशंकर खरे का आज (२० नवम्बर) सुबह निधन हो गया था। उनकी आयु ९८ वर्ष की थी, जो लम्बे समय से अपने ख़राब स्वास्थ्य से प्रभावित थे। उनका जन्म १ नवम्बर, १९२७ ई० को फतेहपुर (उ० प्र०) मे हुआ था। वे अपनी कर्मभूमि मीरापुर, प्रयागराज-स्थित घर मे अपने भरे-पूरे परिवार के साथ कई दशक से रह रहे थे। प्रेमशंकर खरे और उनकी पत्नी कुसुमलता खरे ने अपने जीवन-काल मे ही अपना-अपना देहदान कर दिया था, जिसके कारण उनका शव मेडिकल कॉलेज को सौँप दिया गया था। उनके दो पुत्र हैँ :– पीयूष खरे और प्रत्यूष खरे।

प्रेमशंकर खरे के सारस्वत मित्र व्याकरणवेत्ता एवं भाषाविज्ञानी आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ने बताया कि खरे साहिब अग्रसेन इण्टर कॉलेज, इलाहाबाद मे अंगरेज़ी और नागरिकशास्त्र के प्रवक्ता थे और वहीँ प्रधानाचार्य-पदभार ग्रहण करने के पश्चात् वर्ष १९८७ मे सेवानिवृत्त हुए थे।

उनका शैक्षिक अवदान महत्त्व का रहा। वे एन० सी० आर० टी०, स्टेट इंस्टिट्यूट ऑव़ एजुकेशन, ब्यूरो ऑव़ साइकोलॉजी और यू० पी० बोर्ड ऑव़ एजुकेशन इत्यादिक शैक्षिक संस्थाओँ मे प्रतिभा संदर्भ, परामर्शदाता, लेखक, समीक्षक, अनुवादक आदिक के रूप मे जुड़े रहे। उनकी हिन्दी और अंगरेज़ी मे समान गति रही।

आचार्य के अनुसार, एक साहित्यकार के रूप मे खरे साहिब का विशेष योगदान रहा। उन्होँने ‘राली’, ‘मिशन अपना-अपना, ‘त्रिधारा’, ‘अन्तर्द्वन्द्व’ (उपन्यास), ‘ध्वनि-प्रतिध्वनि’ (काव्यसंग्रह), ‘शिक्षाशास्त्र एवं मनोविज्ञान’, ‘भारतीय पत्रकारिता एवं स्वातन्त्र्य संघर्ष’, ‘मानवाधिकार के मूल आधार’, ‘प्रेस ऐण्ड पब्लिक ओपिनियन’, ‘लाइट्स ऑव़ ह्यूमैनिटि’, ‘भारत मे लोकतन्त्र’ (अनुवाद), ‘टुवड् र्स क्वालिटि एजुकेशन’ इत्यादि कृतियोँ के प्रणयन किये थे।

शिक्षाविद् प्रेमशंकर खरे को अनेक सम्मानोँ से सुशोभित किया जा चुका था, जिनमे ‘पं० हेरम्ब मिश्र-स्मृति सारस्वत शिखर-सम्मान’, ‘प्रयाग गौरव’ इत्यादिक हैँ।

उल्लेखनीय है कि साहित्यकार एवं चिन्तक प्रेमशंकर खरे की स्मृति मे ‘सर्जनपीठ’, प्रयागराज की ओर से एक श्रद्धांजलि-समारोह का आयोजन किया गया, जिसमे अजामिल बंशीधर मिश्र, अमरनाथ श्रीवास्तव, रामेन्द्र कुशवाहा, तलब जौनपुरी, शिवराम उपाध्याय ‘मतवाला’, उर्वशी उपाध्याय, आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय इत्यादि प्रबुद्धजन ने खरे साहिब को जीवन्त व्यक्तित्व का स्वामी, कुशल अध्येता, प्रखर साहित्यकार, व्यवहारकुशल और अनुशासनप्रिय बताया।