कवि राजेश पुरोहित–

तू
इतना समझ
फकत मेरे दोस्त
कर समर्पण
बस ।
प्यार
राधा जैसा
कहाँ जीवन में
खुदगर्ज़ हो
तुम ।
चलो
सुन्दर वतन
हम सब बनाएं
आओ साथ
चलें ।
हे
दयालु प्रभु
ईमान पर चलाना
हमको सदा
तुम ।
अरे
कान्हा तुम
हाथ छुड़ा कहाँ
जा रहे
अब ।