“अपनी अद्भुत क्रीड़ा-कौशल और अनोखी ड्रिबलिंग से जर्मन तानाशाह हिटलर का मन मोह लेनेवाले भारतीय हॉकी के युगपुरुष, इलाहाबाद के ध्यानचन्द अपने जीवन-काल में ही देश-विदेश में कई चमत्कारी और सुखद घटनाओं के महानायक बन गये थे। उनकी विनम्रताभरी सादगी उनके सभी गुणों में सबसे बढ़कर थी। अफ़सोस! हम अपने ही घर के अन्तरराष्ट्रीय जादूगर ध्यानचन्द को भूल गये।”
उक्त उद्गार आज (२९ अगस्त, २०१८ ईसवी) हॉकी के महान् खिलाड़ी ध्यानचन्द की जन्मतिथि पर ‘सर्जनपीठ’ और ‘क्रीड़ांचल क्लब’ इलाहाबाद की ओर से बाई के बाग़, इलाहाबाद में आयोजित ‘मेजर ध्यानचन्द– हॉकी के अपराजेय हस्ताक्षर’ परिसंवाद की अध्यक्षता करते हुए, डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ने व्यक्त किये थे।
अपने नाम न बताने की शर्त्त पर इलाहाबाद की एक चर्चित महिला खिलाड़ी ने बताया, “हमें जो हॉकी सिखाते हैं, उन्हें ही ध्यानचन्द जी की उपलब्धियों की कोई समझ नहीं है। हम जब प्रश्न करते हैं तब उत्तर मिलता है– फालतू बातें नहीं, चुपचाप खेलो।” हॉकी-खिलाड़ी रजनीकान्त ने कहा, “हॉकी के खिलाड़ियों के चयन में बहुत पक्षपात होता है। कोच के चमचे और चमचियाँ चुन ली जाती हैं। आज ये सब देखकर ध्यानचन्द जी की आत्मा रोती होगी।” धाविका पूनम का कहना था,”प्रशिक्षण-साधनों का बहुत अभाव है। यहाँ एक-से-बढ़कर-एक खिलाड़ी हैं, जिनकी ओर सरकार का ध्यान नहीं जाता।” मनोज सिंह का विचार था, “हमारा राष्ट्रीय खेल हॉकी है और ध्यानचन्द जी अपने इलाहाबाद के हैं। इसके बाद भी इलाहाबाद हॉकी के मामले में बहुत पिछड़ा हुआ है।” इस अवसर पर सरिता, तारिका, मध्यमा देवी, सुरेश कुमार, चंचला रानी, देवा यादव, सेतु उपाध्याय, अमित पटेल आदि ने विचार व्यक्त किये।