अनिल चौधरी ( बैंक अधिकारी )
इस क्रूर काल के हर रण में,
हर अवरोहण आरोहण में ।
तुम खुद ही खुद का संबल हो,
जीवन संघर्षों के क्षण में ।।
शूलों से छलनी पावों को ,
पीड़ा से रंजित भावों को ।
संयम बल से सहना होगा ,
नित चोटिल उर के घावों को ।।
जीवन रण के तुम रथी बड़े ,
भीषण झञ्झावातों से सदा लड़े ।
सुख-दुःख का नहीं विचार किया ,
हर स्थिति में तुम रहे खड़े ।।
क्यों विफल निशा से बीते तुम ,
नई भोर से क्यों नहीं जीते तुम ।
मन हार गया तब तुम हारे,
मन जीत गया तो जीते तुम ।।