
(प्रख्यात भाषाविद्-समीक्षक)

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय-
आज (२२ दिसम्बर) ‘राष्ट्रीय गणित-दिवस’
‘गणित’ शब्द का जैसे ही प्रस्फुटन होता है, हमारे नेत्रों के समक्ष उपग्रहविज्ञान’ के आदि-प्रणेता ‘आर्यभट’ और महान् गणितविज्ञानी ‘श्रीनिवास रामानुजन्’ की छवि घूम उठती है। आर्यभट की उत्कृष्ट कृति ‘आर्यभटीय’ के दो भाग हैं :–
१- दशगीतिका
२-आर्याष्टशत।
इस गणित-खगोल-विषयक ग्रन्थ में चार पाद हैं :—
पाद अर्थात् चरण
१- गीतिकापाद
२- गणितपाद
३- कालक्रियापद
४- गोलपाद।
प्रासंगिक ‘गणितपाद’ में दशगुणोत्तर संख्याओं के नाम, वर्ग , घन, त्रिभुज, वृत्त, क्षेत्रफल, गोल आदिक पर विचार किया गया है।
३३ वर्ष की अल्पावस्था में श्रीनिवास रामानुजन् ने गणित-विश्व को चार हज़ार से अधिक मौलिक प्रमेय दिये हैं।
(डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय जी की पुस्तक ‘भारतीय विज्ञानी और उनकी देन’ से साभार)