
(प्रख्यात भाषाविद्-समीक्षक)
डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय-
१- अपना स्वार्थ : स्व+अर्थ = स्वार्थ। ‘स्व’ का अर्थ है, ‘अपना’ और ‘स्व’ से पहले ‘अपना’ का प्रयोग हुआ है। ऐसे में, ‘अपना’ शब्द का दो बार प्रयोग ‘पुनरुक्ति-दोष’ के अन्तर्गत आता है अत: केवल ‘स्वार्थ’ का प्रयोग करें।
२- ‘अपना स्वाभिमान’ के भी साथ भी यही दोष रेखांकित होता है :– ‘अपना’ और ‘स्व’ का; दोनों का अर्थ एक ही है।
३- बस इतना ही : बस का अर्थ ‘ही’ होता है और ‘ही’ अलग से है ही। ऐसे में, मात्र एक ‘ही’ का प्रयोग करें। इस प्रकार से :– ‘बस इतना’ अथवा ‘इतना ही’ का ही प्रयोग करें।
४- कभी भी : कभी में ‘भी’ दिख रहा है और अलग से ‘भी’ दिख ही रहा है अतः केवल ‘कभी’ का प्रयोग करें।
फ़िलहाल, इतना ही क्योंकि ‘अपाच्य’ हो जायेगा।