डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय की पाठशाला

September 3, 2019 0

● (शब्दों में प्रतिदिन वृद्धि की जा रही है।) शुद्ध शब्द हैं :– आर्द्र, उद्दण्ड, कर्त्ता, कर्त्तव्य, कर्तृत्व, कर्त्तव्य, वार्त्ता, सान्निध्य, बहुव्रीहि, अन्त:स्थ, कार्यकर्त्ता, कार्यकर्त्री, क़ाबिलीयत, गृहिणी, वाङ्मय, विद्वज्जन, शुभेच्छु, पैतृक, क्षत्रिय, शख़्सीयत, आप्रवासी, अनिवासी, […]

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय की पाठशाला में जानिए शुद्ध शब्द (द्वितीय भाग)

August 31, 2019 0

फ़स्ल दोगुणी प्रत्युत्पन्नमति जिजीविषा विजिगीषा श्रद्धाञ्जलि/श्रद्धांजलि सुषुप्ति जागर्ति जाग्रत् के गणनानुसार प्रवहमान आद्यन्त प्रामाणिक परीक्षोपयोगी सम-सामयिक उच्चतम न्यायालय परिषद् कोंपल आनुवंशिक विद्यालयीय जन्मे जन्मी कार्यालयीय चारों ओर क्रियान्वयन् श्रीमति! देवि! प्रियजन बच्चो! बृहत्तर अन्योन्याश्रित परिशिष्ट […]

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय की पाठशाला में जानिए शुद्ध शब्द (प्रथम भाग)

August 31, 2019 0

शुद्ध शब्द हैं :– कर्त्ता कर्त्तव्य कर्तृत्व कर्त्तव्य वार्त्ता सान्निध्य बहुव्रीहि अन्त:स्थ कार्यकर्त्ता कार्यकर्त्री क़ाबिलीयत गृहिणी वाङ्मय विद्वज्जन शुभेच्छु पैतृक क्षत्रिय शख़्सीयत आप्रवासी अनिवासी दीप प्रज्वलित प्रज्वल उज्ज्वल पीयूष एलान रंग-विरंगे नन्हे-मुन्ने प्रविधान आरोपित जन्मतिथि […]

‘डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय की पाठशाला’ में जानें शब्दों का शुद्ध रूप

July 8, 2019 0

“लम्हों ने ख़ता की, सदियों ने सज़ा पायी” शताब्दियों से हमारे अधिकतर विद्वज्जन, शिक्षकवर्ग लेखकगण तथा विद्यार्थीवृन्द उच्चारण और लेखनगत अनुशासन की अवहेलना करते आ रहे हैं, जो कि सर्वथा अनुचित है; कारण कि अधिकतर […]

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय की पाठशाला में भाषा-विमर्श

June 27, 2019 0

लिपि : जिस प्रकार भाषा की उत्पत्ति कब से हुई है, इसका कोई सर्वमान्य उत्तर अब तक प्राप्त नहीं हो सका है उसी प्रकार लिपि की व्युत्पत्ति का प्रश्न मात्र ‘प्रश्न’ बनकर रह गया है। […]

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय की पाठशाला में वाक्य-संरचना में ‘पूर्ण विराम’ का महत्त्व समझें और मनोरंजन करें

June 18, 2019 0

यह घटना बलिया ज़िले की है। गाँव ‘सुखपुरा’ है। एक कार्यक्रम के दौरान एक महिला मुझसे मिली थी। वह अर्द्ध-शिक्षिता थी। उसका पति झारखण्ड में कोयलरी (कोयला-कारख़ाना) में काम करता था। वह महिला अपने पति […]

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय की पाठशाला ◆ ‘अल्ला-अल्लाह’ को समझें :–

October 19, 2018 0

‘शब्द’ आप्त (प्रामाणिक, निष्णात)मनुष्य-द्वारा व्यक्त ज्ञान है। विज्ञ और पाठक-वर्ग को किसी भी ‘गर्हित मानव-कृत धर्म’ से स्वयं को पृथक् कर, ‘शब्द-संस्कार’ संवर्धन करने की सामर्थ्य अर्जित करनी चाहिए और अपने लोक में शब्द-संधान करना […]

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय की पाठशाला : शब्द-अर्थ-प्रयोग और पुनरुक्ति-दोष

December 26, 2017 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय- १- अपना स्वार्थ : स्व+अर्थ = स्वार्थ। ‘स्व’ का अर्थ है, ‘अपना’ और ‘स्व’ से पहले ‘अपना’ का प्रयोग हुआ है। ऐसे में, ‘अपना’ शब्द का दो बार प्रयोग ‘पुनरुक्ति-दोष’ के अन्तर्गत […]