जिलाधिकारी के प्रस्तावित कार्यक्रम से पहले का आँखों देखा हाल

रिपोर्ट: आदित्य त्रिपाठी और पी.डी. गुप्ता


कछौना(हरदोई): जिलाधिकारी के प्रस्तावित कार्यक्रम के पूर्व एडीओ पंचायत कछौना द्वारा फील गुड कराने के लिए ताबड़तोड़ निरीक्षण किये। हालांकि कमजोर बुनियाद पर बुलंद इमारत की तमन्ना धरी की धरी रह जाती है। निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी को इन खामियों से दो चार होना ही पड़ेगा। यह बात अलग है कि बिल्ली को देखकर कबूतर की तरह आँख बंद कर सब फील गुड ही दिखे।

निरीक्षण के दौरान टीम प्राथमिक विद्यालय बहदिन पहुंची जहाँ पर जर्जर भवन, बाउन्ड्री जर्जर और प्रधानमंत्री की लाख कोशिश के बाद भी रसोई घर में रसोइया लकड़ी-कंडे से चूल्हे पर भोजन बनाने को विवश हैं। विद्यालय परिसर में एक अतिरिक्त कक्ष के पास कंडे व लकड़ी का ढेर लगा था जहाँ तक नौनिहालों का जाना मुनासिब नहीं है। इसके बाद पूर्व माध्यमिक विद्यालय टिकारी में भी रसोई घर में देशी चूल्हे से खाना बनाया जा रहा है। पंजीकृत 55 छात्रों में मात्र 05 छात्र ही उपस्थित थे। मिड डे मील में फर्जीवाड़ा करके नौनिहालों के हिस्से का भोजन किसके पेट में जा रहा है क्या यह डीएम सर को निरीक्षण में दिखेगा? बच्चों को पूर्व में ख़रीदा गया लाखों का फर्नीचर एक कक्ष में कबाड़ में पड़ा है वहीँ बच्चे जमीन पर बैठकर पढ़ने को विवश हैं।

इसी प्रांगण में उच्चतर माध्यमिक विद्यालय कागजों पर संचालित है जिसके अध्यापक देवेश मिश्रा कभी नहीं आते हैं। कक्ष में ताला लगा रहता है। छात्रों का कागज पर फर्जी नामांकन है। प्राथमिक पाठशाला घनश्याम नगर में विद्यालय भवन की स्थिति काफी ख़राब है। विद्यालय का निर्माण वर्ष 2012 में किया गया है लेकिन विद्यालय की दीवारों का प्लास्टर जगह–जगह से टूट कर गिर रहा है जो कि सरकार की खाऊ-कमाऊ नीति का गुणगान कर रही है। रसोई घर में बालू टपकने से नौनिहाल भोजन में बालू खा रहें हैं। विद्यालय परिसर में गहरा गड्ढा है। बच्चों के आवागमन का फाटक अवरुद्ध है जहाँ झाड़ियाँ उग आयी हैं। शौचालयों की स्थिति काफी खराब है, पल्ले टूटे हैं। नौनिहाल व शिक्षक शौच के लिए बाहर जाते हैं।

प्राथमिक पाठशाला व पूर्व माध्यमिक विद्यालय दीननगर में बाउन्ड्री ना होने के कारण गारबेज हॉउस के रूप में तब्दील हो गया है। मैला पड़े होने के कारण विद्यालय के पास खड़ा होना भी दूभर है। ऐसे में नौनिहाल पढाई करें तो कैसे ? विद्यालय परिसर में जानवर बंधे व कंडे के ढेर लगे है। स्वच्छ भारत पर लाखों रुपया पानी की तरह बहाया जा रहा है। शौचालयों व मूत्रालयों की स्थिति बेहद खराब है। पूछताछ में ग्रामीणों ने बताया कि सफाई कर्मी कभी गाँव नहीं आते हैं।

प्राथमिक विद्यालय टुटियारा में विद्यालय परिसर में गड्ढा होने के कारण जल भराव था जिससे विद्यालय प्रांगण तालाब नजर आ रहा था। मौसम बदलने से जहाँ एक ओर मच्छरों का प्रकोप बढ़ रहा है वहीँ डेंगू मलेरिया आदि संक्रामक बीमारी में नौनिहालो के चपेट में आने की प्रबल सम्भावनाएं हैं। शौचालय निर्माण में पीला ईंटा प्रयोग किया जा रहा है। अब जब कछौना शिक्षा पद्धति को माडल बनाने की ओर अग्रसर है व जिलाधिकारी द्वारा गोद भी लिया गया है और साथ ही एच०सी० एल० फाउंडेशन द्वारा पोषित है, तब शैक्षिक परिसरों की यह दयनीय हालत किसी बड़े अकादमिक संकट का इशारा करती है। परिषदीय विद्यालयों के लिए सरकार संजीदा नहीं है या फिर सरकारी मशीनरी सरकार की मंशा पर पानी फेर रही है जबकि केंद्र व राज्य की भाजपा सरकार जीरो टालरेंस की बात कर रही है। ऐसे में कार्यों के प्रति यह उदासीनता कहीं भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रही है।