तुम, तुम हो यार, कुछ भी कर सकते हो

बात कुछ रोज पहले की रही है, अपने एक प्रिय शिष्य से मेरी रोज वार्तालाप होती है, लेकिन उस रोज की सुबह मेरे लिए और उसके लिए काफी दिलचस्प और यादगार रही है। उस रोज सुबह अचानक फ़ोन आया और कहने लगा सर माफ कीजियेगा ! अपनी कुछ असफलताओं पर चर्चा करनी है।

ये मेरा वही प्रिय शिष्य है जो हमेशा जोश में रहता है । लेकिन आज तक कभी उसने मुझे अपनी असफलताओं-गलतियों से रुबरु नहीं कराया ।

मैंने हर बार उससे जानने की कोशिश की कि आखिर जब तक गलती नहीं करोगे सही से सीख भी नही पाओगे ।
हालाँकि मेरी भी व्यस्तता अधिक होने के कारण कभी इसको डॉटकर कुछ पूछा ही नहीं ।

आज उसकी निराशा जनक बातों से लगा क्या ये वही लड़का है ? फिर लगा अब ये सही समय है इसको समझाने और सही रास्ते पर लाकर इसको आइडल बनाने का, क्योंकि आज मैंने उसकी सभी बातों को सुना और मुझे लगा कि अब ये लीडरशिप के लिए तैयार हो गया है ।

ये सुबह दिलचस्प इसलिए भी है क्योंकि मुझे पता है आज से इसकी नादानी, लड़कपन, शरारतीपन सब खत्म होकर गम्भीरता, उदारता, आत्मीयता, और बड़प्पन आने वाला है । सच बताऊँ तो थोड़ी बहुत छूट इसको हमने इसलिए भी दी की इसको वास्तविक दुनियादारी और पहली चोट से ही सम्भलने का हुनर आ जाए । 24 साल के इस लड़के को मैं आज पहली बार बालिग होता हुआ देख रहा हूँ । आज हमने भी दिल खोल के इतने सालों के अपने अनुभव से इस बच्चे से बहुत बातें साझा की ।

कुछ भी कहने से पहले उससे मैंने यह भी कह दिया कि परेशानी अगर नही आएगी तो मालुम नहीं पड़ पाएगा कि आप कितने बहादुर हो । तुम व्यस्त रहते रहे हो इसलिये अब अवसाद में हो, सबसे पहले तुम सभी बातों और परेशानियों को तुरंत भूल कर आज अपने प्यारे से शहर में घूमो । अपने दोस्तों को, अच्छे शुभ चिंतकों को इसमें आमंत्रित करो। घूमने भी ऐसे जाओ जैसे कोई नायक अपनी नायिका को आज पहली बार कहीं घुमाने ले जा रहा है, फिर सोचो मेरी नायिका, मेरे दोस्त, मेरा शहर, मेरा देश और ये दुनिया कितनी खूबसूरत है ।

अब ये सोचो इनके साथ आसमान की ऊंचाइयों से खूबसूरत दुनिया को देखना है या असफलता के चौखट में ही सिमट कर अपनी एक हार पर रोना ही रोते रहना है ।

यार तुम अपनी एक हार पर दम तोड़ देना चाहते हो, आप भूल गए कि आप घर से बाहर इसलिए निकले थे ताकि आप एक दिन रियल हीरो बनके घर लौट कर आओ ।
क्या आप भूल गए हैं कि अपनी और अपने परिवार की ख्वाहिशों को, अरमानों को, जिन्होंने आपके लिए वर्षों से अपने सपने भी संजो कर रखे हैं, उनको पूरा करना है ? क्या हुआ ? जो हुआ सो हुआ, आखिर क्यों आप आज उस तरीके से नहीं लड़ रहे जिस तरीके से आप को लड़ना चाहिए ? क्यों आप उन कदमों से, कसमों से दूर भाग रहे हैं जो आपको जीत दिलाती हैं ? आखिर क्यों आप एक नादान परिंदे की तरह जंजीरों में जकड़े हुए खामोश बैठे हैं ? क्यों अभी तक आपके अंदर का मानव जगा नहीं ?

यार तुम्हारे बारे में इतना जरूर बता दूं कि आप वह हैं जिसके अंदर से ही शख्सियत निकलनी है, तुम यार बहुत बदलाव ला सकते हो । लकीर को इतनी लंबी खींच सकते हो कि आगे आने वाले वर्षों तक तुम सुनहरे बनकर चमकते रहोगे ।

अब ये मत सोचो कि आपने आज तक क्या किया ? सोचो ! जब आप अपने घर से बाहर निकले थे तो आप की आंखों में कुछ ख्वाब थे, आपके होठों पर कुछ जज्बात थे, आपके चेहरे पर एक चमक थी और आपके कर्मों में एक तूफान था । आखिर क्यों आप थम सा गए हैं,? यार बड़ा भी बनना चाहते हो और असफलताओं से भी घबरा रहे हो ।

कल की छोड़ो, अब आप इस कदर मेहनत करो की खुद को सुकून मिले । इतिहास गवाह है इतिहास उन्हीं का लिखा जाता है जो संघर्षों से गुजरते हुए खुद को खुद के लिए खड़ा कर लेते हैं ।

आपके अंदर दम है, ताकत है, शिद्दत है, जुनून है
जज्बा है, जज्बात है, ख्वाब है, ख्यालात है । यह भी याद रखिये आप इंसान हैं जो लड़ सकता है, गिर के उठ सकता है, जो हार के भी जीत सकता है, और जीत के भी फिर जीत सकता है । बच्चे! तुझे कैसे हारने दूँगा, तेरी जिम्मेदारी है मुझ पर ? जाओ पहले घूम के आओ, फिर पूरी ताकत से जुट जाओ और अब बस तभी रुकना जब सफलता हमारे कदमों में हो ।

ऐसी कोई चीज नहीं है, जो हम मेहनत, लगन व आत्मविश्वास से नहीं पा सकते. खुद पर भरोसा रखा करो, आप अपनी किस्मत खुद बना सकते हो ।

“”ऑल द बेस्ट””

बस, धन्यवाद देकर उसने फ़ोन काट दिया
शाम को फ़ोन करके मैंने ही पूछा कैसे हो, घूमने गए थे, बताया हां जी सर! वहीं से लौट रहा हूँ, बहुत मजा आया है आज !

मैंने उसे बताया कि कल तुम नई दिल्ली जा रहे हो, एक टीम और एक छोटा ऑफिस तुम्हारा इंतजार कर रहा है, इस टीम के कप्तान तुम हो और उप कप्तान एक सेवानिवृत आईएएस अफसर हैं ।

आज दो माह बाद मेरे दो सेवानिवृत आईएएस अफसर मित्र मुझे बता रहे हैं कि उम्मीद के मुताबिक लड़का कैप्टेंसी अच्छी कर रहा है । 2 माह उसने ऑफिस, स्टाफ का मार्गदर्शन एवं कुशल नेतृत्व किया है । ऑफिस भी बड़ा कर लिया है, दो दिन पहले उसे अपलिंक और डाउनलोडिंग टेलीपोर्ट लिंक का लाइसेंस (“न्यूज़ चैनल का लाइसेंस”) मिल गया है, लेकिन वो गुरूवार को आज लेने गया है, आप को बहुत याद करता है ।

(मुझे पता है और उम्मीद है जब भी तुम यह पढ़ रहे होगे तो नई शुरुआत करके बहुत आगे बढ़ चुके होगे, आपके उज्जवल भविष्य की कामना में मेरे बच्चे )

आपका शुभ चिंतक
  रमेश मिश्र, IAS


रमेश मिश्र ( आई.ए.एस. ) की फेसबुक वाॅल से साभार