समीक्षक :- राजेश कुमार शर्मा”पुरोहित”
साहित्यकार, भवानीमंडी
लखनऊ की कवयित्री कुमुद श्रीवास्तव वर्मा की कृ
ति कुमुद की कलम से का संपादन साहित्य संगम संस्थान की राष्ट्रीय उपाध्यक्षा आचार्य सोम्या मिश्रा अनुश्री जी ने बड़े कुशल ढंग से किया। उनका मार्गदर्शन आचार्य भानुप्रताप मिश्र जी ने किया।यह इस कृति का प्रथम संस्करण 2018 में प्रकाशित हुआ। ग्राफिक्स डिजाइनर का कार्य दर्शन जी बोरडे ने बहुत सुन्दर किया।मुखावरण बहुत मनमोहक लगा। इलाहाबाद विश्वविद्यालय इलाहाबाद से दर्शन शास्त्र में स्नातकोत्तर लेखिका ने अपनी कृति में सामाजिक सरोकारों से जुड़ी बातें अपनी रचनाओं में लिखने का प्रयास किया है।
कृति में शुभकामना संदेश में साहित्य संगम संस्थान के अध्यक्ष राजवीर सिंह मन्त्र ने लिखा कि लेखिका में अदभुत लेखन क्षमता है जो सकारात्मक विचारधारा का वातावरण उत्पन्न करने की सामर्थ्य रखती है। यह पुस्तक नव सदी का गौरव गान बनेगी। कवयित्री के भावी साहित्यिक जीवन का मार्ग प्रशस्त करेगी। वस्तुतः लेखिका ने रोजमर्रा की घटनाओं को ही अपनी कविताओं का विषय बनाया है। समाज में महिलाओं की क्या स्थिति है ? नारियों की पीड़ा के प्रति धारदार कलम चलाई है। साथ ही अर्वाचीन समस्याओं की ओर भी ध्यान आकृष्ट किया है यथा:- मंहगाई, बेरोजगारी आदि विषयों पर भी पैनी कलम चलाई है।
कवयित्री की भाषा शैली वर्णात्मक है। सीधी,सरल भाषा बोधगम्य लगी। शब्दों का चयन देखते बनता है। जज्बात आदि।
लेखिका ने लिखा आओ एक इतिहास रचें कुमुद की कलम से।
एक इतिहास बन जायेगा वाकई यदि इन रचनाओं को पढ़ आम जनता जागरूक बन जाये तो।
बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ जैसी सोच को समाज के मध्य लाने हेतु सार्थक लिखा।तोड़ें बंधन रूढ़ता का। आज जरूरत है समाज मे वैज्ञानिक सोच विकसित हो। मानव समाज व्यर्थ रूढ़िवादी न बने । मन की चाह अलबेली,भगवद गीता बच्चों की कविता, होली,गणतंत्र दिवस, चमत्कार आंखों से उसके नीर बहा, हे कान्हा, प्रेम, विदाई गीत वक्त, कलम ,माँ, अधूरी प्यास और माँ, माँ का आँचल,समय का सदुपयोग आदि सारगर्भित व ज्ञानवर्धक रचनाएँ इस संकलन के उद्देश्य को पूर्ण करती है।
विदाई में लेखिका लिखती है:-” दोनों कुल की रीत निभाना। माँ बाबुल को भूल न जाना।” बेटियां दो कुलों में उजियारा करती है। वक़्त कविता में कवयित्री लिखती है:- जो वक़्त का साथ निभाएगा। वक़्त उसे ऊपर ऊँचा और उठाएगा।। कलम कविता में उन्होंने लिखा:- जज्बातों से भर गया पृष्ठ। कुछ बदले तब हालात मेरे।।
समाज में नया परिवर्तन लाने का जज्बा रखने वाली लेखिका ने अपनी कविताओं में पचास शेर व उत्कृष्ट कविताओं से इस कृति को निखार दिया। साहित्य जगत में इन कविताओं का स्वागत है। आपकी यह कृति नव इतिहास रचे। समाज सुसंस्कृत हों।
बधाई।
98,पुरोहित कुटी,श्रीराम कॉलोनी भवानीमंडी जिला झालावाड़ राजस्थान