सावधान!! कहीं आप सफ़ेद ज़हर तो नहीं पी रहे हैं

Corruption Feature IV24

कछौना(हरदोई): सावधान! दूधिये दूध में मिलावट कर आपके जीवन के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। हजारों लीटर सफ़ेद जहर की खपत रोज हो रही है। जिसे जाने-अनजाने में हम सभी ले रहे हैं। लाखों लोग दूध के नाम पर मीठा जहर पी रहे हैं। दूधिये दूध की उपलब्धता बढ़ाने के लिए निरीह पशुओं को ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन लगा रहे हैं जो कछौना में किराना व चोकर की दुकानों से आसानी से मिल जाता है। यह इंजेक्शन हार्मोन प्रसव कराने के लिए दिया जाता है।

यह मांसपेशियों को ढीली करते हैं जिससे प्रसव आसानी से हो जाता है जोकि प्रतिबन्धित है। इसकी वजह से एलर्जी, सांस लेने में दिक्कत, शरीर का भार अधिक होना, सूजन, सिरदर्द, भूख में कमी, बच्चों का असामान्य शारीरिक विकास प्रभावित होता है। दिवाली का त्योहार होने के कारण दूध व दूध से बनने वाले दुग्ध उत्पादों की मांग कई गुना बढ़ गई। इसका फायदा उठाने के लिए मिलावट करने वाले कारोबारी सक्रिय हो गए हैं, वहीं केमिकल से तैयार करके यह दूध धड़ल्ले से बाजार में बेचा जा रहा है। यह केमिकल से दूध तैयार करके सण्डीला व लखनऊ में सप्लाई कर देते हैं। इससे सिंथेटिक खोया भी बनाते हैं।

हमारी संस्कृति में दूध को अमृत की संज्ञा दी गई है। शुरूआती दिनों में दूधिये अधिक लाभ लेने के लिए पानी मिलाते थे, लेकिन अब तो अधिक कमाई के चक्कर में मिलावटखोर साबुन, सोडा से दूध बना रहे हैं। अधिकांश दूध डेयरियों पर दूध का संग्रह कर उससे क्रीम निकाल ली जाती है तथा बचे हुए सप्रेटा दूध को बाजार में खपाने के लिए उसमें विभिन्न हानिकारक रसायन, पेण्ट आदि मिलाकर दूध की जगह लोगों को जहर बेचा जा रहा है। कृत्रिम दुग्ध निर्माण में व्यवसायी रिफाइण्ड ऑयल, टूथपेस्ट, यूरिया, शाकर ऑयल, वाशिंग पाउडर इत्यादि विषाक्त पदार्थों को मिलाते हैं। दूध में मृत जीवाश्म को संरक्षित रखने वाला फार्मालीन तक मिलाया जाता है। फार्मालीन जहर है इससे सिंथेटिक दूध ख़राब नहीं होता है। दूध न फटने के लिए कपड़ा धोने वाला काष्टिक, सोडा, यूरिया, डीएपी खाद का प्रयोग करते हैं। मिली जानकारी के अनुसार एक किलो मिल्क पाउडर, 100 ग्राम रिफाइण्ड से, एक डिब्बी वॉटर कलर, खड़िया से दस लीटर दूध तैयार हो जाता है वहीं दूधिये घटतौली भी करते हैं। यह नापने वाले लीटर को तली से अंदर की तरफ दबा देते हैं जिससे दूध की मात्रा कम हो जाती है। ग्राहक आसानी से ठगी का शिकार हो जाता है। दूध की हमारे दैनिक जीवन में छोटे बच्चों से लेकर रोजाना चाय, लस्सी, मिठाई, आइसक्रीम, मिल्क पाउडर, घी आदि में प्रयोग होता है जबकि मिलावटी दूध पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्ती की है जिसमें आईपीसी के धारा 272 में संशोधन कर उम्रकैद का प्रावधान किया है। हाईकोर्ट पीठ ने कहा है कि दूध में मिलावट एक गंभीर मामला है। सामाजिक कार्यकर्ता ने सूचना अधिकार के तहत सूचना मांगी थी जिसमें खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन हरदोई ने बताया कि वर्ष 2013-14 में 44 नमूने लिए गए थे जिसमें 24 में मिलावट की पुष्टि पाई गई थी, जिसमें एक लाख उनसठ हजार रुपये का जुर्माना लिया गया था। कछौना क्षेत्र में सैकड़ों दूध डेयरी मानकों को ताक पर रखकर धड़ल्ले से चल रही है जिन्हें सम्बंधित विभाग के अधिकारियों को मौन स्वीकृति प्रदान है।

मिलावटी दूध की पहचान-

★मिलावटी दूध उबलने पर मलाई नहीं देता है।
★मिलावटी दूध का रंग हल्का पीला होता है।
★दूध में हल्दी डालने पर दूध का रंग लाल हो जाता है।
★सिंथेटिक खोया गर्म करने पर दानेदार नहीं होता है।
★दूध में पानी की मिलावट जांचने के लिए लैक्टोमीटर का भी प्रयोग किया जाता है।