नेता जी के नाम एक ख़त

प्रभात सिंह (मान्यता प्राप्त पत्रकार), लखनऊ-


नेता जी,

आपके ऊपर लोहियावादी पार्टी और समाजवादी परिवार का भार है, इस भार को वहन करना आसान नहीं है। आज के दौर में “हम दो हमारे दो” टाइप वाले परिवार बचाना मुश्किल है। फिर आपके परिवार का कुनबा तो बड़ा है। उसपर से बहुतमत की सरकार वाली पार्टी। पार्टी की सरकार है और सरकार परिवार की दोनों ही अपने कद में बड़े हैं। फिर कोई डर तो जरूर रहा होगा, परिवार या पार्टी टूटने का। उस डर से उपजे असुरक्षा की भावना ने सब ख़त्म करने की ठान ली है शायद। बेटे भाई के बीच में आपने भाई को चुना, कौन चुनता है बेटे के सामने अपने भाई को आज कल।

आप लोहियावादी,समाजवादी सहित सिद्धांतवादी भी हैं। इस पूरे घटनाक्रम में सबसे ज्यादा परेशानी में आप ही होंगे। कोई कुछ भी सही न रखने का षड़यंत्र रच रहा होगा, कोई नए सपने गढ़ रहा होगा, कोई अपने को बचाके साफगोई के साथ निकल जाने की कोशिश कर रहा होगा। पर आप अपने आपको उम्र की इस अवस्था में भी मजबूती के साथ थामे रखे हैं। आप पार्टी और परिवार के धुरे हैं, सभी आपकी बात मानने का दम्भ भरते हैं, फिर भी कोई नहीं मान रहा।

परिवार से लेकर पार्टी तक में आपके दायें और बाएं हाँथ की चर्चा हो रही है लेकिन आपकी नहीं हो रही है। पर बेहद विचित्र स्थिति में आप होंगे। इस घर्षण में सबसे ज्यादा नुकसान आपका ही होगा। पार्टी और परिवार में दो फाड़ होने की संभावनाओं के बावज़ूद भी दोनों धड़े आप के ही कंधे पर बन्दूक रख कर निशाना साध रहे हैं। उत्तर प्रदेश और राजनीति के इतिहास से लेकर भविष्य तक की बातें की जा रही हैं। लेकिन सब इस विघटन का ठीकरा किसी के सर मढ़कर हल्का होना चाहते हैं। आप शिक्षक रहे हैं और पहलवान भी। उसके बाद आप नेता जी हुए हैं। जाहिर सी बात है आप कई मोर्चों पर मजबूती से लड़ रहे हैं। आपके युद्ध कौशल के कारण ही पार्टी और परिवार बचा हुआ था। क्या आप थकने लगें हैं और थक के कोई सुरक्षित किनारा चाहते हैं ? बड़ी मुश्किल में होंगे आप। इस मुश्किल घड़ी में जनता का ख्याल करियेगा। शायद आपको ताकत मिले।