आज विश्व भर में बसे भारतीय शहीद सम्राट भगत सिंह की 112वीं जयंती मना रहे हैं । अपने विचारों, व्यक्तित्व और कर्मों से भगत सिंह आज भी हर नौजवान के दिल में जिन्दा हैं । क्रांतिकारी जन संघर्ष मोर्चा हरदोई जिला कार्यकारिणी द्वारा शहीद उद्यान पार्क में वीर क्रांतिकारी सरदार भगत सिंह की जयंती मनाई गई । प्रदेश उपाध्यक्ष उत्तर प्रदेश योगेश विक्रम सिंह ने उनके चित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धा सुमन अर्पित किए । साथ सभी पदाधिकारियों को उनके बलिदान के बारे में बताया । भगत सिंह का ‘इंकलाब जिंदाबाद’ नारा कालजयी साबित हुआ । वह हर भाषण और लेख में इसका जिक्र करते थे ।
श्री सिंह ने कहा कि आज हम लोग भगत सिंह जैसे वीर क्रांतिकारियों के बलिदान के चलते ही आजाद है । सरदार भगत सिंह का जन्म 28 सितम्बर 1907 को लायलपुर में हुआ था । भारत के इस नगीने को 23 मार्च 1931 को फांसी दी गई थी । शहीद भगत सिंह भारत के प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी थे। चन्द्रशेखर आजाद व हिन्दुस्तान रिपब्लिक एसोसिएशन (हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिक एसोसिएशन ) के अन्य सदस्यों के साथ मिलकर इन्होंने देश की आज़ादी के लिए अभूतपूर्व साहस के साथ शक्तिशाली ब्रिटिश सरकार का मुक़ाबला किया। पहले लाहौर में साण्डर्स की हत्या और उसके बाद दिल्ली की केन्द्रीय संसद (सेण्ट्रल असेम्बली) में सुखदेव व राजगुरु के साथ बम-विस्फोट करके ब्रिटिश साम्राज्य के विरुद्ध खुले विद्रोह को बुलन्दी प्रदान की। इन्होंने असेम्बली में बम फेंककर भी भागने से मना कर दिया। फाँसी पर जाते समय वे तीनों मस्ती से गा रहे थे –
मेरा रँग दे बसन्ती चोला, मेरा रँग दे बसन्ती चोला।
मेरा रंग दे बसंती चोला, माए रंग दे…. मेरा रंग दे बसंती चोला ।
दम निकले इस देश की खातिर बस इतना अरमान है ।
एक बार इस राह में मरना सौ जन्मों के समान है ।
देख के वीरों की कुर्बानी अपना दिल भी बोला…
मेरा रंग दे बसंती चोला…।
फाँसी के बाद कहीं कोई आन्दोलन न भड़क जाये इसके डर से अंग्रेजों इनके मृत शरीर को फिरोजपुर की ओर ले गये और मिट्टी का तेल डालकर जलाने लग । जानकारी होने पर लोगों का हुजूम उमड़ते देख डरकर अंग्रेजों ने इनकी लाश के अधजले टुकड़ों को सतलुज नदी में फेंका और भाग गये । जब गाँव वाले पास आये तब उन्होंने इनके मृत शरीर के टुकड़ो को एकत्रित कर विधिवत दाह संस्कार किया । भगत सिंह हमेशा के लिये अमर हो गए । ऐसे वीर क्रांतिकारियों को हमारा शत-शत नमन है ।
जिला अध्यक्ष श्याम सिंह ने सभी क्रांतिकारियों के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा जो आजादी आज हमे प्राप्त है क्रांतिकारियो के बलिदान से मिली है न की चरखे से । हम सभी ऐसे वीर क्रांतिकारी को नमन करते हैं । अरुन सिंह, पौरुष पांडेय, सौरभ पाल, विवेक सिंह चंदेल, संजीव सिंह, संदीप सिंह, अमर श्रीवास्तव, अभय बाजपेई, प्रद्युम्न प्रताप सिंह, यश मिश्रा, आकाश बाबू, अमर वर्मा, शुभम पटेल, धर्मेंद्र कुमार आदि पदाधिकारी मौजूद रहे ।