‘दैनिक जागरण’ ने आज से ‘विज्ञानी’ शब्द का प्रचलन आरम्भ किया

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

आज (१७ जून) से ‘दैनिक जागरण’ ने ‘साइण्टिस्ट’ की शुद्ध हिन्दी ‘विज्ञानी’ शब्द का प्रयोग आरम्भ किया है, जो हमारे शिक्षित समाज के लिए एक प्रकार की अमूल्य शिक्षा है। दीर्घकाल से जिस शब्द का ‘विशेषण’ के रूप में प्रयोग होता आ रहा है, उसका व्यवहार अब देश के शीर्षस्थ दैनिक समाचारपत्र ‘दैनिक जागरण’ ने ‘संज्ञा’ के रूप में प्रयोग कर, अपनी जागरूक दृष्टि का परिचय दिया है। इसके लिए विशेषत: ‘दैनिक जागरण’ के सम्मान्य राष्ट्रीय सम्पादक विष्णुप्रकाश त्रिपाठी जी को श्रेय जाता है, जो ‘हिंदी हैं हम’ अभियान के अन्तर्गत यथाशक्य शुद्ध और सम्प्रेषणीय हिन्दी के प्रचार-प्रसार में स्तुत्य योग देते आ रहे हैं और जिसका कुशल संरक्षण ‘दैनिक जागरण’ प्रतिष्ठान’ के स्वामी सम्मान्य संजय गुप्त जी कर रहे हैं।

विस्मय का विषय है कि उच्च शिक्षा-प्राप्त लोग, भाषाशास्त्री, भाषाविज्ञानी, भाषापण्डित, भाषाविद्, वैयाकरण, आचार्यत्व के विशेषण से आभूषित लोग इत्यादिक अब तक मौखिक और लिखित भाषाओं में ‘वैज्ञानिक’ का ही प्रयोग करते आ रहे हैं; जैसे– हमारे देश के ‘वैज्ञानिकों’ का कल सम्मेलन होगा। यहाँ यह होना चाहिए– हमारे देश के ‘विज्ञानियों’ का कल सम्मेलन होगा। डॉ० होमी जहाँगीर भाभा एक परमाणु ‘वैज्ञानिक’ थे। यह भी अशुद्ध है। यहाँ होगा– डॉ० होमी जहाँगीर भाभा एक परमाणु ‘विज्ञानी’ थे।

अब समझें, ‘वैज्ञानिक’ के रूप में कहाँ प्रयोग होता है।
उदाहरण के लिए– (१) देश की ‘वैज्ञानिक’ कर्मशाला में नये-नये प्रयोग किये जा रहे हैं। (२) अब उसका मनोवैज्ञानिक परीक्षण अपरिहार्य हो गया है।

इसी तरह से ‘भाषाविज्ञानी-भाषावैज्ञानिक, ‘मनोविज्ञानी-मनोवैज्ञानिक’ इत्यादिक के प्रयोग में भिन्नता है।

इस शब्द-शुचिता को सार्वजनिक कर, ‘दैनिक जागरण-परिवार’ ने हमारे शब्द-शुचिता अभियान को बल प्रदान किया है। पुन: स्पष्ट कर दूँ, साइण्टिस्ट को ‘विज्ञानी’ कहते हैं और साइण्टिफ़िक को ‘वैज्ञानिक’।

पिछले दिनों अत्यन्त सहज कर्तृत्व के स्वामी सम्मान्य राष्ट्रीय सम्पादक विष्णुप्रकाश त्रिपाठी जी से इस विषय पर गम्भीरतापूर्वक हमारी वार्त्ता हुई थी, जो हम दोनों के लिए एक प्रकार का ‘सत्संग’ था, जो अब ‘लोक-कल्याण’ का विषय बन चुका है।

तो आइए! हम संकल्प करें– अब संज्ञा के अर्थ में ‘विज्ञानी’ और विशेषण के अर्थ में ‘वैज्ञानिक’ का प्रयोग करेंगे।

(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; १७ जून, २०२० ईसवी)