मैं किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में एक 'बचत खाता' खोलना चाहता हूँ, जिसमें देश के समर्थ नागरिकों से बिना किसी दबाव के, प्रसन्नतापूर्वक, सगर्व दान करने का अनुरोध किया जायेगा, दान की धनराशि 'एक रुपया' से आरम्भ होकर यथाशक्य रहेगी। प्राप्त धनराशि से अभावग्रस्त; किन्तु मेधासम्पन्न प्रतियोगितात्मक परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों की यथासम्भव सहायता की जायेगी; वह विद्यार्थी आपके क्षेत्र का भी हो सकता है। इसके लिए आप हमें सम्बद्ध विद्यार्थी के विषय में जानकारी भेजेंगे। हमारी माँग पर आप उस विद्यार्थी के आवश्यक विवरण-सहित उसके घर का पता और उसका सम्पर्क-सूत्र आदिक (मोबाइल नम्बर) भेजेंगे।
आपदा-विपदा से जूझ रहे निकटतम क्षेत्रों की जनता के लिए खाद्यान्न/पक्का भोजन, स्वस्थ जलपान, पेय जल, चिकित्सा आदिक की व्यवस्था करायी जायेगी। इसके लिए स्थानीय स्तर पर एक 'सेवासहायता-दल' का गठन किया जायेगा, जिसके सदस्य स्वयं के मार्गव्यय वहन करने में समर्थ रहेंगे।
पिछले दिनों मैंने उक्त विषय में एक राष्ट्रीयकृत बैंक के प्रबन्धक और अपने शुभचिन्तक से वार्त्ता की थी। मैंने उनसे ‘आपदा-विपदा राहतकोष’ नाम से एक बचत खाता खोलने का आग्रह किया था। उन्होंने बताया था– आप ‘अपने नाम’ से खाता खुलवाइए; क्योंकि किसी संस्था के नाम से खुलवायेंगे तो आपको तरह-तरह की अनावश्यक कठिनाइयाँ आती रहेंगी; ऑडिटवाले परेशान कर देंगे।
ऐसे में, मैंने अपने ही नाम (पृथ्वीनाथ पाण्डेय– Prithwi Nath Pandey) से ‘यूको बैंक’, इलाहाबाद में ‘बचत खाता’ खुलवाने का विचार किया है। इसमें मैं अपनी ओर से एक हज़ार रुपये जमा करूँगा। बचत-खाता-विवरण सार्वजनिक कर दिया जायेगा तथा प्राप्त धनराशि-विवरण भी सार्वजनिक किया जाता रहेगा। किस उदारमना ने कब और कितनी धनराशि भेजी है, इसे भी सार्वजनिक किया जायेगा।
उक्त विचार के आलोक में आप सभी की स्वस्थ प्रतिक्रिया आमन्त्रित है और आप सभी का कुशल मार्गदर्शन भी अपेक्षित है।

आपका सद्भावी
आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय