‘हिन्दुस्तानी एकेडेमी’, प्रयागराज के अधिकारियों की बेईमानी

— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

कई वर्षों से प्रयागराज में स्थित हिन्दुस्तानी एकेडेमी के पदाधिकारियों की कार्यपद्धति पर बेईमानी का साया पड़ चुका है। वैसे भी प्रयागराज के साहित्यकार और अन्य बुद्धिजीवी हिन्दुस्तानी एकेडेमी के पदाधिकारियों की कार्यप्रणाली पर चुप्पी साधे हुए हैं, जिसका परिणाम है कि गोरखपुर से लाकर हिन्दुस्तानी एकेडेमी के अध्यक्ष के रूप में एक सेवानिवृत्त अध्यापक उदय प्रताप सिंह को राजनीतिक दरबार में जी-हजूरी करने के कारण बैठा दिया गया है, जबकि उस एकेडेमी में देश के प्रतिष्ठित बुद्धिजीवी अध्यक्ष मनोनीत होते थे। उदय प्रताप सिंह की अध्यक्षता-अवधि में एकेडेमी की नियमावली की धज्जी उड़ाते हुए, पानी की तरह से रुपये बहाये जा रहे हैं :– वह चाहें पुस्तक और पत्रिका मुद्रित कराने का हो अथवा कार्यक्रम आयोजन करने हो अथवा पुरस्कार देने का हो।

हिन्दुस्तानी एकेडेमी के पदाधिकारियों की बेईमानी के चलते लाखों रुपये के पुरस्कार कुपात्र हथिया ले रहे हैं। पिछले वर्ष एक ऐसे व्यक्ति को पुरस्कार दिया गया था, जिसकी पुस्तक पूर्व में ही छप चुकी थी; परन्तु पुरस्कार पाने के लिए उसने अपनी पुस्तक के शुरू के पेज बदलवा लिये थे, जिसमें प्रकाशनवर्ष, प्रथम संस्करण आदि का उल्लेख रहता है। इस बार अभी हाल ही में एक ऐसे व्यक्ति को लाखों रुपये का पुरस्कार देने की घोषणा की गयी है, जो ‘हिन्दुस्तानी एकेडेमी’ के अध्यक्ष उदयप्रताप सिंह के पास जाकर पूर्व में अनुपयुक्त व्यक्ति की काव्यकृति पर दिये गये पुरस्कार को लेकर अध्यक्ष को ‘ब्लैकमेल’ करता रहा। इस व्यक्ति को भी जो पुरस्कार देने की घोषणा की गयी है, वह भी ‘सन्देह के घेरे’ में है।

यह भी ज्ञात हुआ है कि हिन्दुस्तानी एकेडेमी के अध्यक्ष उदय प्रताप सिंह हिन्दुस्तानी एकेडेमी से अपनी भी पुस्तकें छपवाने के लिए जुट गये हैं।

उत्तरप्रदेश के मुख्यमन्त्री योगी आदित्यनाथ को इस विषय को गम्भीरतापूर्वक लेकर जाँचसमिति गठित करनी चाहिए। इतना ही नहीं, देश के बुद्धिजीवीवर्ग को हिन्दुस्तानी एकेडेमी के बेईमान अध्यक्ष के विरुद्ध एकजुट होकर उक्त और अन्य प्रकार की निन्दनीय कृत्यों का विरोध सड़कों पर आकर करना चाहिए।

(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; १० अगस्त, २०२० ई०।)