कविता : कहाँ हैं आप ?

आकांक्षा मिश्रा-


बात कुछ
अटपटी सा लगी होगी
लेकिन बात शुरू हुई,
कहा हैं आप ?
शायद मन झल्ला गया होगा
निःसन्देह दोनो ही !
आखिर ढाई शब्द के प्रश्न का उत्तर मिला
क्यों ?
मौन एक क्षण होकर
मायूसी ने दस्तक दे दी
बस पूछ लिया
पूछना जरूरी लगा, वजह यही
जरूरी तो सब लगता हैं, सिवा मुझे छोड़ के
सिर्फ काम की बातें होती रहे
ज्यादा अच्छी होगी
अक्सर मैं व्यस्त हूँ,
और फालतू सुनना पसन्द नहीं करता
इतना ही शब्द, बड़ा काम कर गया
लिहाजा शब्दों में परिवर्तन जरूरी होगा
अब बात शुरू होने से पहले, ही खत्म होंगी
पुनरावृत्ति की गुंजाइश नहीं
सामने होकर भी, अजनबी बने रहना
ज्यादा सुखद होगा
मोह का सुखद अनुभव छोड़कर
क्यों ?
अब नहीं ऐसा; चाहो तुम वैसा ही
बस अब यही होगा व्यवहार का परिवर्तन,
कोई काम हैं या नहीं कोई जरूरत
वजह से शुरू होगी
पुनः माफ़ी के साथ एक सन्नाटा ।
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