भारतीय क्रिकेट-दल की ऐतिहासिक और शर्मनाक पराजय!

ऑस्ट्रेलिया ने भारत को केवल ‘३६ रनों’ पर सिमटा दिया!

— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय :

भारत-ऑस्ट्रेलिया के मध्य ऑस्ट्रेलिया में पहली बार ‘दिन-रात’ की क्रिकेट टेस्ट मैच-सीरीज़ खेली जा रही है। पहला टेस्ट मैच ‘एडिलेड’ (ऑस्ट्रेलिया) में खेला गया था, जिसमें पहली पारी में भारतीय दल को ५३ रनों की अग्रता प्राप्त थी। ऐसा लग रहा था कि भारत अपने प्रतिद्वन्द्वी दल ऑस्ट्रेलिया को आसानी से पराजित कर देगा; किन्तु सभी अनुमानों को ध्वस्त करते हुए, दूसरी पारी में ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाज़ों ने भारतीय खिलाड़ियों जो दुर्दशा की थी, उसकी कल्पना तक किसी ने नहीं की थी। दूसरी पारी में २१.२ ओवरों में मात्र ३६ (छत्तीस) गेंदों पर भारत के नौ खिलाड़ी आऊट हो चुके थे, जबकि मो० शमी चोटिल होकर खेल से बाहर हो चुके थे।

भारतीय दल का कोई भी खिलाड़ी ‘दहाई’ का अंक छू नहीं सका था। वरीयता-क्रम में सर्वाधिक रन बनानेवाले खिलाड़ियों में मयंक अग्रवाल ने ९ और हनुमा विहारी ने ८ रन बनाये थे; पुजारा, रहाणे तथा अश्विन खाता भी नहीं खोल सके थे। ‘रन मशीन’ कहलानेवाले विराट कोहली ४ रन बनाकर चलते बने, मानो उस मशीन में ज़ंग लग गयी हो। ऑस्ट्रेलिया की ओर से हेजलवुड ने मात्र ८ रन देकर पाँच भारतीयों को बाहर का रास्ता दिखाया था, जबकि कमिंस ने २१ रनों के चारे खिलाकर चार खिलाड़ियों के शिकार कर लिये थे। ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाज़ों की उछालभरी गेंदों के सामना करने में भारत के कथित महान् खिलाड़ियों के पसीने छूट गये थे। इस प्रयास में उसके नौ खिलाड़ी पैवेलियन की ओर ‘हारे हुए जुआड़ी’ की तरह से एक-के-पीछे-एक जाते हुए दिख रहे थे। ऑस्ट्रेलिया की जीत का रास्ता भारतीयों ने अपनी अकर्मण्यता का प्रदर्शन कर बहुत ही आसान बना दिया था। फिर क्या था, ऑस्ट्रेलिया की जीत के राह में केवल ९० रनों की दूरी थी, जिसे उसने बनाकर ८ विकेटों से पराजित करते हुए, यह ऐतिहासिक विजय अपने नाम कर ली है। अब चार मैचों की इस सीरीज़ में ऑस्ट्रेलिया १-० से आगे हो चुका है। भारत ने प्रथम पारी में २४४ रन बनाये थे और द्वितीय पारी में केवल ३६ रन, जबकि ऑस्ट्रेलिया ने प्रथम पारी में १९१ और द्वितीय पारी में २ विकेटों ९३ रन बनाये थे।

निस्सन्देह, १९ दिसम्बर, २०२० ई० की तारीख़ भारतीय क्रिकेट-खिलाड़ियों के मुँह पर ‘कालिख़’ पोतनेवाली ‘तवारीख़’ बन चुकी है। उल्लेखनीय है, टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में भारत का यह (३६ रन) न्यूनतम कुल रनसंख्या (स्कोर) है। इससे पहले भारत का न्यूनतम स्कोर ४२ रन था, जिसे इंग्लैण्ड के विरुद्ध वर्ष १९७४ में लाड र्स के मैदान में बनाया था।

अब यह विचारणीय है कि जिन गेंदबाज़ों और बल्लेबाज़ों ने प्रथम पारी में बेहतर प्रदर्शन किये थे, वे दूसरी पारी में ‘हवा-हवाई’ क्यों होते रहे?

(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; १९ दिसम्बर, २०२० ईसवी।)