दाने-दाने में भरी हैं ऐसी बीमारियाँ जो आपको गंभीर रोगों के साथ दे रही हैं मौत !

नशे पर विशेष

अवनीश मिश्रा (सह सम्पादक, अवध रहस्य)

तंबाकू से कैंसर होता है। शराब सेहत के लिए हानिकारक होती है । इन बातों को आज के समाज में रहने वाले बच्चे से लेकर बुजुर्ग सभी जानते हैं लेकिन इन बातों का डर किसी को नहीं है।

पान की दुकानों से लेकर शराब की दुकानों तक ऐसे जहरीले मादक पदार्थों की असीमित बिक्री और व्यापार का अंदाजा भी नहीं लगाया जा सकता।

नशे के व्यापार को बढ़ावा देने के लिए इनके विज्ञापनों को बहुत ही लुभावने तरीके से बना कर करोड़ों रुपए खर्च कर बाजारों में परोसा जाता है। खास बात तो यह भी है की इन विज्ञापनों का प्रचार फिल्म जगत के ऐसे कलाकार करते हैं जो इसको खाना तो छोड़िए ऐसे पदार्थों को खुद से कोसों दूर रखते हैं क्योंकि उन्हें भी पता है की ऐसी चीजों के सेवन का परिणाम क्या होता हैं लेकिन अच्छे पैसे मिलने के चलते ये कलाकार अपने फैन्स जो की इनपर आंख बंद करके भरोसा करते हैं मात्र अपने फायदे के लिए उनके साथ धोखा करने से नहीं कतराते हैं।

पान मसाले के विज्ञापनों को आकर्षक बनाने के लिए कलाकारों की फोटो के बगल यह भी लिखा जाता है

पहचान कामयाबी की, खुशबू और ताजगी का एहसास जो रिफ्रेस करे मुझे और पूरे इंडिया को, शाही स्वाद शाही अंदाज, *असली स्वाद जिंदगी का* इत्यादि जैसे पूरे भारत वासियों की जिंदगी इससे आगे और कुछ नहीं और और कामयाब होना है तो पान मसालों का सेवन करें।

नशा लत क्यों बन जाता है?

“पहले आनंद, फिर चाहत, उसके बाद नशे के बिना न रह पाने की हालत।”
आइए आपको आधुनिक विज्ञान के नजरिए से कुछ महत्वपूर्ण तथ्यों को समझाते हैं की नशे की लत क्यों और कैसे लग जाती है। इन तथ्यों को समझना इसलिए भी जरूरी है क्योंकि आज के समाज में एक बड़ी बीमारी एक महामारी के रूप में फैल चुके नशे को समझने और छोड़ने में मदद मिल सके।

आज नशा कई तरह के पदार्थों जैसे शराब, तंबाकू, गांजा, पान मसाला, भांग, हीरोइन, कोकीन, और भी अन्य कई रूपों में बेंचा जा रहा। व्यक्ति जब भी किसी नशीली चीज का सेवन करता है जिसका सीधा प्रभाव इंसान के दिमाग पर पड़ता है। नशीले पदार्थों में पड़ा घातक रसायन दिमाग के कुछ महत्वपूर्ण हिस्सों को प्रभावित करता है जिससे शरीर की बाकी नसें शिथिल हो जाती है जिसको इंसान नशे में आनंद की अनुभूति समझता है लेकिन वास्तविकता में वो खुद को एक दर्दनाक मौत की तरफ धकेल रहा होता है। नशे का प्रभाव इंसान में वैसी ही भावनाएं जाग्रत करता है जैसे व्यक्ति को दूसरी अपने मनपसंद की चीजे देख कर मन में उसे पाने की ललक पैदा करती है लेकिन नशे की ये भावनाएं बाकी चीजों की तुलना में अत्यधिक प्रबल होती हैं।
नशे की ये भावनाएं इंसान के दिमाग की कोशिकाओं के जरिए डोपामीन हार्मोन के रूप में कुछ रासायनिक प्रतिक्रिया के जरिए संदेश का विस्तार करती हैं इसी मुख्य वजह से व्यक्ति में नशीले पदार्थो के सेवन की प्रबल इच्छा जाग्रत होती है । नशे के बढ़ते सेवन के साथ ही व्यक्ति के दिमाग में नशीले पदार्थो की एक प्रबल इच्छा पैदा करता है की लो चाह कर भी नशा छोड़ पाने में सक्षम नहीं हो पाते और दिन पर दिन उनमें नशे की तलब बढ़ने लगती है
नशीले पदार्थ इंसान के दिमाग पर ऐसे हावी हो जाते हैं की व्यक्ति का खुद के शरीर और दिमाग पर काबू नही रहता और सांसे धीमी होने लगती है । नशा ना मिल पाने की स्थिति में चिड़चिड़ापन और परेशानी का अनुभव करने लगता है । उसी व्यक्ति को ऐसे हालातों में नशा मिल जाए तो वो खुद सामान्य और हल्का महसूस करने लगता है इसे ही नशे की लत कहा जाता है । इसीलिए कहा जाता है की नशीले पदार्थो के सेवन से दूर रहना चाहिए अन्यथा व्यक्ति कब नशे की तरफ खिंच कर खुद के जीवन और अपने शरीर को बर्बाद कर लेता है और उससे बाहर निकल पाने में खुद को कमजोर और असहज महसूस करने लगता है।

तंबाकू

तंबाकू से बने उत्पादों में निकोटीन रसायन एक ऐसा पदार्थ है जिस की लत आसानी से लग जाती है। मुख्य रूप से निकोटिन सिगरेट में पड़ी तंबाकू में मिलाया जाता है, सिगरेट का निकोटीन फेफड़ों के माध्यम से दिमाग तक पहुंचता है। एक रिसर्च में यह भी सामने आया है कि स्मोकिंग आजमाने वाले लोगों को सिगरेट की लत बहुत ही आसानी से लग जाती है जो भविष्य में हमारे फेफड़ों को तो नुकसान पहुंचाती ही है साथ ही गले के कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के रूप में उभर कर सामने आती है।

पान मसाला

गुटखे पर बैन के बाद गुटखे से तंबाकू हटाकर पान मसाले के साथ बड़ी ही सफाई से बड़ी-बड़ी मुनाफा खोर कंपनियों ने पान मसाले के साथ तंबाकू का एक अलग पाउच देना शुरू कर दिया। पान मसाले में प्रयोग किए जाने वाली सुपारी जो की सड़ी हुई होती है और उसमें पड़े अन्य रासायनिक पदार्थ सिर्फ मुंह ही नहीं शरीर के अन्य हिस्सों के लिए भी बहुत ही हानिकारक होते हैं। पान मसाले में पड़े हानिकारक तत्वों से मसूड़ों सहित मुंह की त्वचा भी सड़ने लगती है जिससे मुंह का कैंसर भी बनता है। पान मसालों में डाले गए घटिया और खतरनाक पदार्थों और रसायनों से गले पर भी बहुत बुरा असर पड़ता है। पान मसाले के सेवन से पहले व्यक्ति की आवाज में बदलाव देखने को मिलता है और फिर गिल्टी के साथ ही दर्द जैसी समस्या भी बन जाती है जो कि आगे चलकर एक गंभीर बीमारी का रूप ले सकती है।

शराब

शराब का अधिक सेवन करने से शरीर में पर्याप्त मात्रा में इंसुलिन बनना बंद हो जाता है जिससे व्यक्ति डायबिटीज, लीवर में सूजन जैसी गंभीर और जल्दी ना खत्म होने वाली बीमारियों से ग्रसित हो जाता है, समय रहते शराब की लत पर काबू न किया जाए तो यह पेनक्रिएटिक कैंसर जैसे गंभीर रोग को जन्म देती है। शराब पीने वालों के पाचन तंत्र पर भी गहरा असर डालती है जिससे खाने में कमी और एसिडिटी जैसी समस्या भी उत्पन्न होती है।

नशे के व्यापार को बढ़ावा देने में महत्त्वपूर्ण भूमिका किसकी

समाज में फैल रही नशे जैसी मानसिक विकृति को बढ़ावा देने में आकर्षक विज्ञापनों के साथ ही बन रही आज की फिल्मों और वेब सीरीज का बहुत बड़ा योगदान है।
आजकल फिल्मों में जिस तरह हीरो हीरोइन धुवें का छल्ला बनाते हुए फैशन में शराब बार में आकर्षक तरीकों से डायरेक्टर के कहने पर अदाएं करते हैं उसका बहुत ही गहरा प्रभाव आजकल के युवाओं पर पड़ता है और साथ ही वही फिल्मी कलाकार युवाओं के पसंदीदा हो तो फिर क्या कहना।

नशे के व्यापार में सरकार का सरोकार

“नशा मुक्त भारत” ये नारा तो सभी ने सुन ही रखा होगा सरकार द्वारा दिए गए इस नारे के बाद कई मां-बाप कई महिलाओं की आंखों में उम्मीद जागी कि अब उनके घरों के बच्चे उनके पति नशे की लत से मुक्ति पा जाएंगे । लेकिन पिछली और तात्कालिक सरकार द्वारा दिए गए इस छलावे को वे समझ ना पाए।

मैं नशा मुक्त भारत के इस नारे को छलावा इसलिए कह रहा हूं, क्योंकि भारत को अगर नशा मुक्त करना ही था तो सरकारें अलग अलग विभाग बनाकर नशा बेचने का लाइसेंस क्यों देती है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह भी है कि आम जनता और कई समाजसेवियों ने इसका विरोध भी किया लेकिन सत्ताधारी सरकार और बाहुबली व्यापारियों के सामने कमजोर होकर उन्हें भी नतमस्तक होना पड़ा। नशे के खिलाफ आक्रोशित जनता को दूसरे मुद्दों का मीठा लड्डू खिलाकर दूसरी दिशा में ध्यान का ध्यान आकर्षित कर मुख्य मुद्दे से भटका दिया गया।
सरकारें तो नशीले पदार्थो की आकर्षक पैकिंग पर वैधानिक चेतावनी लिखवा कर अपना पल्ला झाड़ लेती हैं बाकी शरीर आपका जीवन आपका, आपको स्वस्थ जीना है या कष्ट में फैसला आपका।

अवनीश मिश्र, लखनऊ