★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय
उत्तरप्रदेश के ब्लॉक-प्रमुख-चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की गुण्डागर्दी तथा उत्तरप्रदेश ज़िला-प्रशासन और पुलिसतन्त्र की सरकारी ग़ुलामी और नपुंसकता सुस्पष्ट दिखी हैं, जो कि आगामी विधानसभा के लिए एक विस्फोटक संकेत है। उत्तरप्रदेश-शासन ने ब्लॉक-प्रमुख के चुनाव में जितनी तरह की गुण्डागर्दी करा सकती थी, करायी। खुले आम पत्रकारों पर हमला और विरोधी दलों को नामांकन करने से रोकना और अगवा करना, ज़िला-प्रशासन-द्वारा विरोधी दलों को धमका कर चुनाव न लड़ने के लिए बाध्य करना आदिक से सुस्पष्ट हो चुका है कि भारतीय जनता पार्टी के अधिकतर प्रत्याशी चुनाव नहीं जीते हैं, बल्कि गुण्डई के बल पर क़ब्ज़ा किये हैं, जिसमें सभी ज़िलाप्रशासन-अधिकारियों और पुलिसतन्त्र ने आँखें मूँदकर उत्तरप्रदेश-शासन की ‘ऐतिहासिक’ ग़ुलामी करते हुए, अपने ‘नपुंसक’ चरित्र का प्रमाण दे दिया है। सच्चाई यह है कि यदि ईमानदारी के साथ चुनाव कराये जाते तो भारतीय जनता पार्टी को १०० सीटें भी नहीं मिल पातीं। सरकारी तन्त्र के दुरुपयोग का ही कारण रहा कि ८२५ में से ६२६ सीटें भारतीय जनता पार्टी हथिया ले गयी है। प्रबलतर प्रतिद्वन्द्वी दल ‘समाजवादी पार्टी’ केवल ९८ सीट जीत सकी है।
उल्लेखनीय है कि भारतीय जनता पार्टी के ज़िलापंचायत-चुनाव में बुरी तरह से पराजित होने पर उत्तरप्रदेश के मुख्यमन्त्री आदित्यनाथ की साख ख़तरे में पड़ चुकी थी और उनके राजनैतिक अस्तित्व पर ग्रहण लगता दिख रहा था; फिर क्या था, आदित्यनाथ-द्वारा साम-दाम-दण्ड-विभेद की नीतियाँ अपनाकर किसी भी स्थिति में अपनी साख बचानी ज़रूरी हो गयी थी। यही कारण है कि समस्त सरकारी मशीनरी का भरपूर दुरुपयोग करते हुए और हिंसक वातावरण बनाते हुए ब्लॉक-प्रमुख के चुनाव को एकपक्षीय बना दिया गया, जो कि नितान्त निन्दनीय-निकृष्ट निदर्शन (उदाहरण) है।
अब विचारणीय विषय यह है कि उत्तरप्रदेश के आगामी विधानसभा-चुनाव में उत्तरप्रदेश-शासन की चुनावी नीति क्या इससे भी बदतर दिखेगी। क्या विपक्षी दल, विशेषकर समाजवादी पार्टी इससे भी बुरी स्थिति में स्वयं को पायेगी?
(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; १० जुलाई, २०२१ ईसवी।)