सुबह जब सोकर उठा तो आज के समाचार पत्रों TV न्यूज़ चैनलों में एक अतिमहत्वपूर्ण खबर पर नज़र ठहर गयी।
विस्तार से पढ़ा-देखा कि हमारे देश के प्रधानमंत्री अपने विभिन्न साथियों के साथ एक बैठक कर रहे हैं श्री लंका की आर्थिक बदहाली पर और चिंता जाहिर कर रहे हैं कि ये आर्थिक बदहाली भारत में भी आ सकती है।
चूँकि मेरी समझ वित्तीय मैनेजमेंट पर ठीक ठाक है इसलिए मेरी उत्सुकता इस विषय की तह तक जाने की हुई तब एक साथ कई प्रश्न मन में उठे, उन प्रश्नों में से सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह कि;
क्या सचमुच श्री लंका जैसी आर्थिक बदहाली हमारे देश भारत मे आ सकती है?
दूसरा प्रश्न;
क्या सचमुच जनता को उनके संवैधानिक चारों जनाधिकारों से जुड़े अवसर व संसाधनों को निःशुल्क वितरित करने मात्र से भारत में आर्थिक बदहाली आ सकती है?
तीसरा प्रश्न;
क्या देश के मौजूदा प्रधानमंत्री सचमुच भारतीय अर्थव्यवस्था के बदहाल होने पर चिंतित हैं?
चौथा प्रश्न;
क्या देश के प्रधानमंत्री व उनकी वित्तीय टीम के पास देश की आर्थिक बदहाली से उभरने का स्थायी समाधान है?
इत्यादि …
आईए जानते हैं उपरोक्त प्रश्नों के अंदर छुपे धूर्त कुराजनैतिक षड्यंत्र को निम्नलिखित विश्लेषण के माध्यम से ..
विश्लेषण;
श्री लंका जैसी आर्थिक बदहाली भारत जैसे विशाल आर्थिक बजट वाले देश में कभी नही आ सकती।
क्योंकि भारत देश अचल सम्पदा व विभिन्न नेचुरल रिसोर्सेज़ एवं ह्यूमन रिसोर्सेज़ के दम पर अगले 1000 सालों तक भी बिना किसी अतिरिक्त आर्थिक बजट के जीवनयापन कर सकने में सक्षम है।
चूँकि दूसरा प्रश्न अतिमहत्वपूर्ण है क्योंकि आज की प्रधानमंत्री जी की इस बैठक का असल मकसद ही इस प्रश्न के इर्दगिर्द सडयंत्र संरचना पर आधारित है इसलिए इस प्रश्न के उत्तर को विस्तार से जानना व समझना अति आवश्यक है।
जैसा कि मौजूदा एक नई राजनैतिक Aam Aadmi Party जो कि दिल्ली जैसे छोटे केंद्रशासित प्रदेश में पिछले 9 सालों से चल रही है उसके मुखिया Arvind Kejriwal जी लगातार मानवीय चारों जनाधिकारों (पूर्ण शिक्षा-प्रशिक्षण, रोजगार के अवसर व संसाधन, सड़क-पीने का साफ़ पानी-बिजली-संचार-परिवहन, चिकित्सा-बीमा-बैंकिंग-पेंशन व सेल्टरिंग) से संबंधित अवसर व संसाधनों को दिल्लीवासियों के बीच समुचित मात्रा (औसत मध्यम स्तर) में निःशुल्क अनिवार्य व अबाध्य रूप वितरित कर उनके रोजमर्रा के जीवन स्तर को बेहतर से बेहतर बनाने में अपनी न्यायशील व संवैधानिक भूमिका निभाने में सफल हो रहे हैं।
इतना ही नही जबसे केजरीवाल जी ने दिल्ली राज्य को संभाला है तब से लेकर अबतक विभिन्न योजनाओं को निःशुल्क करने के बावजूद राज्य के बजट को भी लगभग 250% बढ़ाया है वो भी नागरिकों व व्यापारियों पर बिना अतिरिक्त टैक्स के बोझ तले दबाए।
विचारणीय!
सबसे बड़ी घटना;
दिल्ली में इन्ही चारों जनाधिकारों के वितरण वाले मॉडल को तत्कालीन अन्य चुनावी राज्यों में प्रचारित कर हाल ही में पँजाब राज्य में आमआदमीपार्टी ने प्रचंड बहुमत से सरकार बनाने में सफलता अर्जित कर चुकी है।
उपरोक्त घटनाक्रम से घबराकर मौजूदा केंद्र की मोदी सरकार ने तरह-तरह से केजरीवाल सरकार पर आरोप-प्रत्यारोप व व्यक्तिगत अटैक करना भी शुरू कर चुकी है।
जैसा कि दिल्ली में LG के माध्यम से करवाती आ रही है।
यहाँ समझने वाली बात सिर्फ इतनी ही है कि जब दिल्ली प्रदेश के मुखिया अरविंद केजरीवाल जी दिल्ली जनता के बीच साबित कर चुकी है कि विभिन्न सार्वजनिक योजनाओं को निःशुल्क, अनिवार्य व अबाध्य रूप से वितरित करने के बाद भी सरकार को बिना किसी घाटे के चलाया जा सकता है तो आज जो देश की वित्तीय बदहाली के नाम पर बैठक हुई उसमें राज्य सरकारों द्वारा संवैधानिक रूप से व न्यायोचित मुफ्त दी जाने वाली योजनाओं को वित्तीय बदहाली का कारण बनाने का सडयंत्र क्यों रचा जा रहा है?
क्यों निःशुल्क योजनाओं को श्रीलंका की बदहाली से जोड़कर कुप्रचार करने का सडयंत्र किया जा रहा है?
वास्तव में मोदी सरकार पूर्णतः डर चुकी है अरविंद केजरीवाल जी के दिल्ली मॉडल से, बस इसी चिंता के चलते आज की बैठक में यह मुद्दा बनाया गया।
सोंचिये!
क्या देश के नागरिकों को पूर्ण रूप से शिक्षित-प्रशिक्षित करने से मानव संसाधन (ह्यूमन रिसोर्स) इस काबिल (स्किल्ड डेवलप्ड) नही बन जाता कि वो देश के विभिन्न प्राकृतिक संसाधनों की समुचित उपलब्धता के साथ सदुपयोग कर अपने व अपने परिवार के लिए आजीविका के अवसर पैदा कर सके?
और जब एक ह्यूमन रिसोर्स अपनी पात्रतानुसार रोजगार के अवसर को प्राप्त कर लेता है तब वह प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से देश की अर्थव्यवस्था को बढ़ाने में सहयोग करता है।
क्या एक अशिक्षित/कुशिक्षित/अल्पशिक्षित ह्यूमन रिसोर्स कभी देश की अर्थव्यवस्था को बढ़ाने में सहयोग कर सकता है?
उत्तर है नही!
तो फिर केजरीवाल जी द्वारा दी जा रही निःशुल्क योजनाओं से देश वित्तीय संकट में कैसे फंस सकता है?
आदरणीय Narendra Modi जी केजरीवाल जी की संवैधानिक रूप से दी जा रही निःशुल्क योजनाओं से भारतीय अर्थव्यवस्था संकट में नही आएगी बल्कि आपका झूँठ व भाजपाई प्रॉपेगैंडा की जनता के बीच पोल खुलने का संकट रूपी डर आपको सता रहा है जिसके कारण आज आप अनाप-शनाप सडयंत्र करने पर उतारू हैं।
सच तो यह है मोदी जी कि आपकी सनक भरी व धूर्त कुराजनैतिक महत्वाकांक्षी योजनाओं के कारण ही देश आज बदहाली की कगार पर खड़ा है क्योंकि न तो आपके पास कोई न्यायशील वित्तीय योजना है और न ही आपकी नियत है।
देशवासियों को आज न्यायशील शिक्षा का 25% बजट चाहिए व रोजगार का 25% बजट चाहिए एवं सार्वजनिक सेवाओं-सुविधाओं का 25% बजट चाहिए और जड़-जंगल-जमीन, वृक्ष-वनस्पतियों, पशु-पक्षियों एवं मनुष्यों के लिए 25% संरक्षण बजट चाहिए।
यहीं से न्यायशील आर्थिक प्रगति का शुभारंभ होगा जिसे आमआदमीपार्टी ने शुरू भी कर दिया है।
यह कारवाँ अब रुकेगा नही ..थकेगा नही ..इंकलाब है ..आकर ही रहेगा .. Mind it …!
(राम गुप्ता, स्वतंत्र पत्रकार)
अति साधारण कार्यकर्ता/प्रचारक
आम आदमी पार्टी, उत्तरप्रदेश