घटनाक्रम कुछ यूँ हुआ कि 22 तारीख को सुबह गोमतीनगर विस्तार के एक अपार्टमेंट में जो एक प्रतिष्ठित चैनल के सह-निदेशक का आवास बताया जा रहा है, उसी आवास पर छापा मारने की फ़िराक़ में इनकम टैक्स विभाग के चार अफ़सर मय पुलिस फ़ॉलोअर गए थे। लेकिन पुलिस की गाड़ी पीछे थी और अफ़सरों की गाड़ी आगे। एक पुरानी मॉडल इनोवा जैसे ही अपार्टमेंट के गेट पर पहुँची तो बैरियर लगा होने के चलते गाड़ी रोकनी पड़ी। गाड़ी के रुकते ही चारों अफ़सर बड़ी तेज़ी से उतरे और अपनी ड्यूटी निभाने के क्रम में अपार्टमेंट की ऊपर की मंज़िल की तरफ़ सीढ़ियों से भागे। इसी दौरान गेट पर मौजूद सिक्यूरिटी गार्ड ने रोकने का प्रयास किया, लेकिन अफ़सरों ने उसे अनदेखा करते हुए भागना जारी रखा। फिर क्या था गार्ड ने अपनी ड्यूटी निभा दी और अपार्टमेंट में मौजूद सेफ़्टी अलार्म को दबा दिया। जिससे साइरन बज उठा और गार्ड चोर-चोर की आवाज़ लगाता हुआ पीछे भागता रहा। दूसरी ओर अफ़सरों के फ़ॉलोअर भी पीछे_पीछे भाग रहे थे। फिर क्या था सीन देख कर कुछ ऐसा लग रहा था कि कुछ बदमाश भाग रहे और पुलिस पीछा कर रही। इतने में अपार्टमेंट के कुछ तेजतर्रार महिला और पुरुषों ने हिम्मत दिखायी और चारों इनकम टैक्स अफ़सरों को कमरों में बंद कर जमकर धुनाई कर दी। लेकिन बाद में सच सामने आने और बड़ी मुश्किल से छूट कर जान बचाने में कामयाब हुए अफ़सरों के प्रति अपार्टमेंट वासियों ने काफ़ी खेद व्यक्त किया और जिन लोगों ने इन पर ज़्यादा हाथ साफ़ किया था वह मौक़े से फ़रार हो लिए।
पूरी घटना/दुर्घटना मात्र भ्रम के चलते हुई लेकिन इसमें सबसे ज़्यादा हास्यास्पद पहलू तब उजागर हुआ जब किसी ने पुलिस फ़ॉलोअर से पूछा भाई आपने साहब लोगों को बचाया क्यों नहीं । तो जवाब आया हमें तो सिर्फ़ साथ जाने को कहा गया था। हालांकि पुलिस ने पूरे मामले में एफआईआर दर्ज कर ली है जो कि इनकम टैक्स अधिकारियों के द्वारा 30 तारीख को दी गई।
वहीं कुछ लोगों ने पुलिस पर यह आरोप भी लगाए हैं कि उनका नाम इस मामले में फर्जी तरीके से घसीटा जा रहा है। जिन्होंने इस पूरी घटना को अंजाम दिया वो सब मौके से फरार हो गए थे।