आन्दोलनकारी विद्यार्थियों के नाम ‘आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय’ का संदेश

हमारे प्रिय विद्यार्थिवृन्द!

आप किसी भी शासन की व्यवस्था के विरुद्ध आन्दोलन, धरना-प्रदर्शन करें; किन्तु हिंसक और अराजक के रूप मे नहीं। आपका आन्दोलन शान्तिपूर्ण होना चाहिए। पुलिसतन्त्र के उकसावे पर भी आप अपना धैर्य और संयम न खोयें। आप यदि ऐसा नहीं करते हैं तो ‘निर्मम’ सरकार और उसका व्यवस्थातन्त्र किसी भी सीमा तक गिर सकते हैं; पाप कर सकते हैं, जैसा कि करते आ रहे हैं। वे आपके जीवन और भविष्य को समाप्त भी कर सकते हैं। इसे हम वर्तमान सरकार के कार्यकाल मे ‘अतीत’ मे भी देख चुके हैं। प्रशासन सरकार की पराधीनता को जीता आ रहा है। एक ग़ुलाम अपने मालिक के इशारे पर नाचने के लिए बाध्य और विवश है, ठीक उसी तरह से ‘पुलिस-प्रशासन’, ‘ज़िला-प्रशासन’ तथा अन्य प्रशासनिक इकाइयाँ ‘क्रीतदास’ की तरह से सरकारी संकेत पर नाचते रहने के लिए ‘विवश’ हैं। उन्हीं मे से कुछ ऐसे होते हैं, जिनके ख़ून मे ही ग़ुलामी भरी रहती है।

आप अपने घर से दूर रहकर पढ़ने के लिए ‘अन्तेवासी’ (यहाँ ‘अन्त:वासी’ अशुद्ध है।) के रूप मे रह रहे हैं। आपमे से ऐसे भी विद्यार्थी हैं, जो स्थानीय हैं। आप अपना भविष्य सँवारने के लिए अध्ययन कर रहे हैं; कष्टसाध्य-श्रमसाध्य जीवन जी रहे हैं; परीक्षा-आवेदन- प्रपत्र भर रहे हैं; भर चुके हैं तथा परीक्षाएँ दे रहे हैं। आपमे से ऐसे भी अभ्यर्थी हैं, जो परीक्षाएँ दे चुके हैं; किन्तु उनका परिणाम घोषित नहीं किया जा रहा है; ऐसे भी हैं, जिन्हें न्याय पाने के लिए न्यायालयों मे अनावश्यक रूप से चक्कर लगवाया जा रहा है तथा ऐसे भी हैं, जो सफल हो चुके हैं; परन्तु उन्हें सेवा मे नहीं लिया जा रहा है। इन सभी स्थितियों और परिस्थितियों मे आपका धैर्य बहुत समय तक टिका रह नहीं सकता; आप ही नहीं, किसी का भी धैर्य और संयम जवाब दे देगा; किन्तु आप यदि आपे से बाहर आकर तोड़फोड़ और अन्य विध्वंसक कृत्य करेंगे तो उससे हम भारतवासियों की सम्पत्ति की क्षति होगी। हम पर निरंकुश सरकार इतने प्रकार के कर लाद देगी कि हम अपांग-से (‘अपंग’ अशुद्ध है।) दिखने लगेंगे। सरकारें तो देश-राज्य का ख़ज़ाना ख़ाली कर आती और चली जाती हैं, प्रभावित हम और आप होते हैं; हमारा देश होता है, सत्तालोलुप ख़ुदगर्ज़ नेता और उनका ग़ुलाम प्रशासनतन्त्र नहीं।

आप थोड़ा धैर्य और सह लें। अगले माह से पाँच राज्यों के विधानसभा-चुनाव आयोजित किये जायेंगे। जिस किसी भी सरकार के पुलिसकर्मियों ने आप पर अनावश्यक रूप से बर्बरतापूर्वक लाठियों से प्रहार किये हैं, उन सरकारों की सत्ता की चूलें हिलाने ही नहीं, अपितु उखाड़ फेंकने का आपको अवसर प्राप्त होनेवाला है। वास्तव मे, आपके साथ यदि अन्याय हुआ हो तो ‘रचनात्मक प्रतिशोध’ लेते हुए, आपको उनके पक्ष मे मतदान न करते हुए, अहम्मन्य और आततायी सरकारों को सत्ताच्युत करने की भूमिका का निर्वहण करना होगा। सम्प्रदाय, जाति, वर्गादिक से परे रहकर आप सभी उन निर्मम सत्ताप्रतिष्ठानो को ध्वस्त करते हुए, अपनी ‘विद्यार्थि-एकता’ का अविस्मरणीय और ऐतिहासिक परिचय दें, ताकि नयी गठित सरकारें आपके विरुद्ध अन्याय करने से पहले हज़ार बार सोचने के लिए बाध्य और विवश हो जायें।

आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; २९ जनवरी, २०२२ ईसवी।)