राष्ट्रमण्डल-खेल– २०२२
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय
आज ७ अगस्त की तारीख़ भारतीय महिला और पुरुष- क्रिकेट-दल के लिए निराशा और आशा की रही। जहाँ राष्ट्रमण्डल खेल– २०२२ मे पहली बार शामिल किये गये महिला टी-२० अन्तरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच के फ़ाइनल-मुकाबले मे ऑस्ट्रेलिया ने भारत को ९ रनो से पराजित कर, राष्ट्रमण्डल-खेल-इतिहास का पहला स्वर्णपदक जीतकर एक ऐतिहासिक कीर्तिमान अर्जित कर लिया है, वहीं भारतीय पुरुष-क्रिकेटदल ने वेस्टइण्डीज़ को फ़्लोरिडा (संयुक्त राज्य अमेरिका) मे खेले गये पाँचवें और अन्तिम टी-२० अन्तरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच मे पराजित कर, पाँच मैचों की टी-२० शृंखला ४-१ से अपने नाम कर ली है।
ऑस्ट्रेलियाई महिला-दल ने पहले बल्लेबाज़ी करते हुए, २० ओवरों मे ८ विकेट खोकर कुल १६१ रन बनाये थे, जिसके जवाब मे भारतीय दल ने २० ओवरों मे अपने सभी विकेट खोकर १५२ रन ही बना पाये थे।
एक समय ऐसा भी दिख रहा था, जब भारतीय महिलाक्रिकेट-दल को अपनी ऐतिहासिक जीत के लिए ३३ गेंदों मे मात्र ४४ रन बनाने थे और उसके ८ विकेट सुरक्षित थे। हरमनप्रीत शानदार अर्द्धशतकीय पारी खेलते हुए, एक छोर को सँभाले हुई थीं; परन्तु चौदहवें और पन्द्रहवें ओवरों मे उनके विकेट-सहित एक-के-बाद-एक तीन विकेट गिरते चले गये और भारत की जीत की आशा धूमिल पड़ती गयी। बल्लेबाज़ी कर रही थीं, दीप्ति शर्मा और स्नेह राणा। भारत के पाँच विकेट गिर चुके थे। सोलहवें ओवर मे भारत को जीत के लिए २४ गेंदों मे ४१ रन बनाने थे। दोनो ने अपनी पारी की अच्छी शुरुआत की थी, जिसका परिणाम यह रहा कि १५ गेंदों मे २३ रन बनाने की ही ज़रूरत रह गयी थी; लेकिन स्नेह राणा रन-आऊट हो चुकी थीं। इस प्रकार भारत के ६ विकेट १३९ रनो पर गिर चुके थे। धीरे-धीरे, खेल का चरमोत्कर्ष भी दिखने लगा था। अब मात्र १२ गेंद रह गये थे, जिनमे भारतीय खिलाड़िनो को १७ रन बनाने थे; मगर १८ वें ओवर की पहली ही गेंद पर राधा यादव रन-आऊट हो गयी थीं। इस प्रकार भारत के ७ विकेट गिर चुके थे और जीत के लिए उसे ११ गेंदों मे १७ रनो की ज़रूरत थी। आख़िरी के दो ओवर उतार-चढ़ाव और रहस्य-रोमांच से भरपूर दिख रहे थे। भारत को जीत के लिए ९ गेंदों मे १३ रन चाहिए थे। उसी बीच, १९वें ओवर मे दो चौके लगानेवाली दीप्ति शर्मा के विरुद्ध पगबाधा-आऊट को लेकर की गयी अपील पर निर्णायक ने आऊट दे दिया था। दीप्ति ने रीव्यू लिया भी; पर व्यर्थ रहा। इस प्रकार १४९ रनो पर भारत के ८ विकेट गिर चुके थे; आशा क्षीण होती जा रही थी।
निर्णायक मैच का आख़िरी ओवर शुरू हो चुका था और भारत को ११ रनो की ज़रूरत थी। बल्लेबाज़ थीं, यास्तिका भाटिया और मेघना सिंह। अन्तिम ओवर की दूसरी गेंद पर दो रन लेने के चक्कर मे मेघना ने अपना विकेट गवाँ दिया था। अन्तिम ओवर के तीसरे गेंद पर रेणुका सिंह को निर्णायक ने पगबाधा क़रार दे दिया था; परन्तु रेणुका ने निर्णय के विरुद्ध डी० आर० एस० ले लिया, जो व्यर्थ रहा। भारत अपना १०वाँ विकेट विकेट भी खो चुका था। इस प्रकार ऑस्ट्रेलिया ने भारत को ९ रनो से पराजित कर, महिलाओं के टी-२० अन्तरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच का स्वर्णपदक जीत लिया है।
उल्लेखनीय है कि ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़िनो की बल्लेबाज़ी, क्षेत्ररक्षण तथा गेंदबाज़ी क़ाबिले तारीफ़ रही। उन्होंने भारतीय बल्लेबाज़ों की १४वे-१५वें ओवरों से ही कमर तोड़नी शुरू कर दी थी। भारतीय क्षेत्ररक्षण और गेंदबाज़ी भी उत्तम कोटि की थी; परन्तु बल्लेबाज़ी लड़खड़ाती गयी। भारत की हार के पीछे एक कारण उसके अपने पहले ही मैच मे ऑस्ट्रेलिया के हाथों पराजित होना भी हो सकता है, जिसके कारण उसके खिलाड़ियों पर मनोवैज्ञानिक प्रभाव का पड़ना हो सकता है।
बहरहाल, भारतीय महिला क्रिकेटदल ने रजत पदक जीतकर भी भारत का मानवर्द्धन किया है। हमारी सभी खिलाड़िने बधाई के पात्र हैं।
(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; ८ अगस्त, २०२२ ईसवी।)