तीसरे टी०-२० मैच मे ऑस्ट्रेलियाई महिला-क्रिकेटदल से भारतीय महिला-दल को मुँह की खानी पड़ी!

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

पिछले दिनो मुम्बई मे खेले गये ‘दूसरे मास्टरकार्ड वीमन्स टी-२० इण्टरनेशनल’ मे जिस तरह से भारतीय महिला-दल ने ‘सुपर ओवर’ मे शानदार जीत हासिल की थी, उसके लिए तीसरे मैच मे १७३ रनो का लक्ष्य अर्जित करना बहुत आसान दिख रहा था; परन्तु भारत की ओर से दिशाहीन गेंदबाज़ी, लापरवाहपूर्ण क्षेत्ररक्षण, विकेटरक्षण तथा बल्लेबाज़ी के चलते, ऑस्ट्रेलिया ने भारत को तीसरे मैच मे बहुत आसानी से हरा दिया था।
भारतीय कप्तान हरमनप्रीत का टॉस जीतकर पहले क्षेत्ररक्षण करने का फ़ैसला बिलकुल सही था; परन्तु ख़राब थ्रो, कैच छूटने, डॉट बॉल खेलने तथा स्मृति मन्धाना और ऋचा घोष की अदूरदर्शी-संयमहीन बल्लेबाज़ी के कारण ऑस्ट्रेलिया ने अपने समझदारीभरे प्रदर्शन से भारतीय दल को पराजय की ओर धकेल दिया था, यद्यपि दसवें से बारहवें ओवर तक मैच का पलड़ा भारत की ओर झुका हुआ था।

ऑस्ट्रेलियाई महिला-क्रिकेटदल ने आज (१४ दिसम्बर) मुम्बई मे खेले जा रहे ‘थर्ड मास्टरकार्ड टी-२० इण्टरनेशनल वीमन’ क्रिकेट-प्रतियोगिता मे बल्लेबाज़ी करते हुए, ८ विकेट पर १७२ रन बना लिये थे। भारतीय गेंदबाज़ बहुत महँगी सिद्ध हुईं, विशेषत: ऑस्ट्रेलिया की प्रमुख बल्लेबाज़ केरी और हैरिस ने सभी गेंदबाज़ों की जमकर धुनाई की थी। आरम्भ मे, ऑस्ट्रेलिया के दो विकेट जल्दी ही गिर चुके थे। उसके बाद ऑस्ट्रेलिया के मध्यम-क्रम की बल्लेबाज़ बेहतर प्रदर्शन करती दिखी थीं।

जीत के लिए १७३ रनो का लक्ष्य पाने के लिए जब भारतीय बल्लेबाज़ उतरी थीं तब डार्सी ब्राउन अपने और ऑस्ट्रेलिया के पहले ओवर मे पाँच वाइड बॉल फेंक चुकी थीं। ऐसा लग ही नहीं रहा था कि वे विकेट लेने के लिए गेंदबाज़ी कर रही हों; किन्तु अपने दूसरे ही ओवर मे डॉर्सी ने दबाव मे दिख रहीं भारतीय महिला-क्रिकेटदल की सबसे अधिक महत्त्वपू्र्ण बल्लेबाज़ स्मृति मन्धाना को पैवेलियन भेज दिया था। स्मृति ने बिना गेंद की लाइन मे आये ही गेंद को हवा मे उछाल दिया और कैच-आउट कर ली गयीं। वे १० गेंदों को खेलने के बाद मात्र एक रन बना पायीं थीं। दूसरी आरम्भिक गेंदबाज़ शूट भी प्रभावकारी गेंदबाज़ी कर रही थीं।

भारत की ओर से स्मृति मन्धाना और शेफ़ाली वर्मा बल्लेबाज़ी कर रही थीं। पॉवर प्ले के भीतर ३३ रन पर भारत अपने दो विकेट खो चुका था। इसका कोई प्रभाव ‘पॉवर-हिटर’ शेफ़ाली पर नहीं दिख रहा था और वे दो जीवनदान पाने के बाद भी अपने ही अन्दाज़ मे चौका-छक्का लगाती हुईं, आक्रामक बल्लेबाज़ी करती रहीं, जबकि उनका साथ दे रहीं कप्तान हरमनप्रीत कौर एक रन लेकर शेफ़ाली को अवसर देती रहीं। हरमनप्रीत को भी दो जीवनदान मिल चुके थे। इतना सब घटने के बाद भी भरपूर हौसले के साथ ये दोनो ही खिलाड़ी अपनी मंज़िल की ओर बढ़ती दिख रही थीं। बारहवें ओवर तक ऑस्ट्रेलियाई कप्तान अपनी सात गेंदबाज़ों को आज़्मा चुकी थीं, जिसमे भारत के कुल दो ही विकेट गिरे थे। पिछले मैच की नायिका ऋचा घोष जल्दबाज़ी दिखाते हुए, कैरी के एक ललचाते गेंद को खेलने के चक्कर मे दो ही गेंद खेलने के बाद पैवेलियन लौटने के लिए बाध्य कर दी गयी थीं। पन्द्रहवें ओवर मे मैच ऑस्ट्रेलिया के पक्ष मे जाता दिख रहा था, तब भारतीय कप्तान हरमनप्रीत का विकेट भी उखड़ चुका था। अट्ठारहवें ओवर मे भारत को जीतने के लिए १२ गेंदों मे ४४ रन चाहिए थे। इस प्रकार भारत यह मैच लगभग हार चुका था और परिणाम हुआ भी वही। ऑस्ट्रेलिया की गेंदबाज़ों :– सदरलैण्ड, किंग तथा कैरी के अलावा शेष गेंदबाज़ों का रन-औसत अत्युत्तम रहा। गेंदें थीं, कुल ६ और रन बनाने थे, २७; भारत के हाथों मे चार पुछल्ले विकेट ही बचे थे। भारतीय महिला-क्रिकेटदल २९ ओवरों के मैच मे ७ विकेट पर कुल १५१ रन ही बना सका था। इस प्रकार भारत ऑस्ट्रेलिया के हाथों २१ रनो से पराजित हो चुका था। ऑस्ट्रेलिया ने भारत को तीसरे मैच मे पराजित कर, पाँच मैचों की शृंखला मे २-१ से अग्रता ले ली है।

अम्पायर महिलाएँ थीं; परन्तु आँखों-देखा विवरण सुना रहे टिप्पणीकर्त्ता उन्हें ‘पुरुष अम्पायर’ के रूप मे उनकी गतिविधियों को सुनाते रहे।

भारत के लिए चौथा मैच ‘करो वा मरो’ का रहेगा; क्योंकि ऑस्ट्रेलिया पाँच मैचों मे से दो मैच जीत चुका है और चौथा मैच भारत हार गया तो यह शृंखला भी उसके हाथों से निकल आयेगी।

(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; १४ दिसम्बर, २०२२ ईसवी।)