शिवपुरी : समकालीन कविता के समर्थ हस्ताक्षर दुष्यंतकुमार ने न केवल गजल को हिन्दी काव्य में स्थापित किया, बल्कि उसे लोकप्रिय बनाने और प्रतिष्ठित करने का श्रेय भी उन्हीं को है। यही कारण है कि दुष्यंत कुमार और हिन्दी गजल एक दूसरे के पर्याय के रूप में हमारे सम्मुख हैं। उन्होंने साहित्य की अन्य विधाओं कविता, गीत , गीत नाटक, उपन्यास कहानी आदि में भी लिखा किन्तु ख्याति हिंदी गजल से ही मिली । यह विचार मध्य प्रदेश हिंदी साहित्य सम्मेलन, इकाई शिवपुरी एवं रामकिशन सिंहल फाउण्डेशन के संयुक्त कार्यक्रम दुष्यंत स्मृति काव्य संध्या में वरिष्ठ गजलकार, व्यंग्यकार डॉ. महेन्द्र अग्रवाल ने व्यक्त किये । उन्होंने आकाशवाणी शिवपुरी में मंचित किये गये दुष्यंतकुमार के उपन्यास आंगन में एक वृक्ष के नाट्य रूपांतर की स्मृति ताजा करते हुए उसका बीड़ा उठाने वाले रंगकर्मी दिनेश वशिष्ठ की भी सराहना की ।
स्थानीय दुर्गामठ में आयोजित इस कार्यक्रम की अध्यक्षता गीतकार, गजलकार अवधेश सक्सेना ने की अध्यक्षीय रचना पाठ में उनकी गजल का मकता देखें भजन अवधेश के सुनकर जो डूबे भक्ति सागर में, नशा प्रभु राम का छाया, नहीं, पर कुछ न कुछ तो है । जबकि मुख्य अतिथि के रूप के भोपाल से पधारे बुन्देली लोकगीतकार हरगोविंद पाराशर उपस्थित थे उन्होंने शिवपुरी के साहित्य सृजकों के साहित्यिक योगदान की प्रशंसा की । म. प्र. हिन्दी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष नवगीतकार विनय प्रकाश नीरव ने कहा कि दुष्यंत कुमार ने उर्दू गजल परम्परा को एक मोड़ देते हुए हिन्दी को समृद्ध किया तथा कवियों को एक नई जमीन और नई दिशा प्रदान की। उनकी भाषा में सहजता का गुण है और इसलिये सामाजिक यथार्थ गजलों के माध्यम से जन-जन तक पहुंचा । उनके व्यंग्यों में हास्य की अपेक्षा आक्रोश की प्रबलता है। दुष्यंत के शेरों को सामाजिक, राजनीतिक एवं व्यक्तिगत स्तर पर लड़ाई का हथियार स्वीकार किया गया ।
कार्यक्रम के द्वितीय सत्र में वृहद काव्य गोष्ठी अयोजित की गई जिसमें शहर के साहित्यकारों ने भागीदारी की । अजय जैन अविराम के प्रभावी संचालन में संपन्न इस काव्य संध्या में वरिष्ठ शायर जनाब रफीक इशरत ग्वालियरी, हास्य व्यंग्य के कवि राम पंडित, गीतकार व्यंग्यकार गोविंद अनुज, इरशाद जालोनवी, आशीष पटेरिया ,शरद गोस्वामी, राज कुमार चौहान भारती, राकेश रंजन, दिनेश वशिष्ठ, सत्तार शिवपुरी ,रामकृष्ण मौर्य मयंक, भगवान सिंह सिंह यादव, राधेश्याम परदेशी, विनोद भटनागर अलबेला ,अखलाक खान आदि ने दुष्यंत कुमार के चित्र पर पुष्प अर्पित कर अपनी प्रभावी रचनाओं के माध्यम से कार्यक्रम को गौरवान्वित किया ।
कार्यक्रम के अंत में सम्मेलन के सचिव अखलाक खान ने सभी का आभार व्यक्त करते हुये आशा व्यक्त की कि शहर के समस्त साहित्यकार इसी प्रकार समस्त कार्यक्रमों में सम्मिलित होकर अपनी उपस्थिति से आयोजनों को गरिमा प्रदान करते रहेंगे ।